छत्तीसगढ़ बजट की ऐतिहासिक छलांग: ₹5,000 करोड़ से ₹1.72 लाख करोड़ तक का सफर, 35 गुना बढ़ा राज्य का खजाना…NV News

Share this

छत्तीसगढ़ राज्य के गठन से लेकर अब तक की वित्तीय यात्रा ने एक नया इतिहास रच दिया है। साल 2000 में राज्य बनने के बाद जब पहला बजट पेश किया गया था, तब उसका आकार मात्र 5,000 करोड़ रुपये था। आज 25 वर्षों बाद, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के विजन से यह आंकड़ा 1,72,000 करोड़ रुपये तक पहुँचा है। बजट के आकार में यह 35 गुना की बढ़ोतरी राज्य की सुदृढ़ होती अर्थव्यवस्था और बढ़ते संसाधनों का जीता-जागता प्रमाण है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस ऐतिहासिक वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे ‘संतुलित विजन से विकास की अप्रतिम यात्रा’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के पौने तीन करोड़ लोगों के भरोसे और उनकी आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। सरकार का दावा है कि राज्य ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए पूंजीगत व्यय में वृद्धि की है, जिससे आने वाले समय में रोजगार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।

इस बार के बजट की थीम ‘संकल्प’ (SANKALP) रखी गई है, जो पिछले वर्षों के ‘ज्ञान’ (GYAN) और ‘गति’ (GATI) मॉडल का विस्तार है। बजट में डिजिटल इकोनॉमी, आईटी हब और नवाचार पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि क्षेत्र के लिए ‘कृषक उन्नति योजना’ के तहत ₹35,000 करोड़ का प्रावधान और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए ‘पीएम सूर्य घर योजना’ जैसे बड़े निवेश इस बजट को खास बनाते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य के बजट में की गई भारी बढ़ोतरी दर्शाती है कि सरकार अब मानव संसाधन विकास को सर्वोपरि मान रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बजट का आकार 35 गुना बढ़ना छत्तीसगढ़ की क्रय शक्ति और जीएसडीपी (GSDP) में आए भारी उछाल को दर्शाता है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इसे ‘भविष्य का ब्लूप्रिंट’ बताया है, जिसमें आधुनिक तकनीक के साथ-साथ बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों के विकास का रोडमैप शामिल है। ₹1.72 लाख करोड़ का यह भारी-भरकम बजट छत्तीसगढ़ को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने की दिशा में एक साहसिक कदम है।

Share this