CG Railway Security: ट्रैक पर तीन ट्रेनें! हड़कंप मचा…NV News
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बिलासपुर/(CG Railway Security): छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल मंडल में एक बार फिर ऐसा नज़ारा देखने को मिला जिसने यात्रियों की धड़कनें बढ़ा दीं। कोटमी सोनार और जयरामनगर स्टेशन के बीच एक ही ट्रैक पर तीन ट्रेनें दिखाई देने के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। सामने आई वीडियो क्लिप में साफ दिख रहा है कि, बीच में चल रही पैसेंजर ट्रेन के आगे और पीछे दो मालगाड़ियाँ थीं। दृश्य देखते ही कुछ यात्री घबरा गए और बिना स्थिति समझे ट्रेन से उतरकर दूर भागते भी नज़र आए।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कई यूज़र्स ने इसे “बड़ी लापरवाही” और “गंभीर खतरा” बताते हुए टिप्पणी की, जिससे आम यात्रियों में भी भ्रम फैलने लगा। लोग सोचने लगे कि, क्या रेलवे सिस्टम में कोई गड़बड़ी हुई है या फिर यह किसी संभावित हादसे का संकेत है।
लेकिन मामला सामने आने के बाद बिलासपुर रेल मंडल ने इस पूरी घटना पर आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति साफ की। मंडल के सीनियर डीसीएम अनुराग कुमार सिंह ने बताया कि, वीडियो में जो देखा जा रहा है वह किसी भी तरह की लापरवाही नहीं, बल्कि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम (Automatic Signalling System) का तकनीकी हिस्सा है। उन्होंने कहा कि, सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही जानकारी अधूरी है और उससे लोगों में अनावश्यक दहशत पैदा हुई।
रेलवे अधिकारी के अनुसार, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम में ट्रेनों को निश्चित तकनीकी दूरी पर एक ही ट्रैक पर चलने की अनुमति होती है। यह दूरी लगभग 90 मीटर की होती है, जिसे रेलवे नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुसार तय किया गया है। उन्होंने समझाया कि,यह सिस्टम ट्रेनों के बीच सुरक्षित अंतर बनाए रखते हुए उन्हें नियंत्रित गति से आगे बढ़ने देता है। भारत सहित दुनिया के कई देशों में यह तकनीक इस्तेमाल की जाती है और इसे पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।
अनुराग कुमार सिंह ने यह भी कहा कि, इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों की आवागमन क्षमता बढ़ाना और व्यस्त रेल मार्गों पर सुचारु संचालन बनाए रखना है। इससे ट्रेनों की धड़ाधड़ आवाजाही होने पर भी कन्ट्रोल सेंटर हर स्थिति पर पूरी निगरानी रखता है। उन्होंने बताया कि, जब किसी सेक्शन में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग लागू होती है, तो सेक्शन को छोटे-छोटे ब्लॉकों में बांटा जाता है। हर ट्रेन अपने ब्लॉक में रहती है और सिग्नल सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी ट्रेन सुरक्षित दूरी से आगे या पीछे रहे।
रेलवे के इस स्पष्टीकरण के बाद भी कई यात्रियों ने कहा कि, उन्हें इस सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं थी, इसलिए वे घबरा गए। कुछ यात्रियों ने सुझाव दिया कि, रेलवे को ऐसे तकनीकी बदलावों के बारे में यात्रियों को जागरूक करना चाहिए, खासकर उन रूटों पर जहां ऑटोमैटिक सिग्नलिंग का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इससे अचानक ऐसे दृश्य देखने पर घबराहट नहीं फैलेगी।
स्थानीय रेलवे अधिकारियों का कहना है कि,ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहती है और किसी भी समय ट्रेनें आपस में टकराने की स्थिति में नहीं आतीं। रेलवे ने बताया कि वायरल वीडियो का संदर्भ बिना पूरी जानकारी के लिया गया, जिससे गलतफहमी पैदा हुई। अधिकारी ने कहा कि, आम यात्रियों को भी चाहिए कि, किसी भी संदिग्ध स्थिति में ट्रेन से कूदकर या भागकर अपनी जान जोखिम में न डालें। ट्रेन के कर्मचारी या गार्ड से जानकारी लेना हमेशा बेहतर और सुरक्षित विकल्प होता है।
रेलवे ने साफ कहा है कि, ऐसी तकनीकी प्रक्रिया कई वर्षों से लागू है और इससे यात्रियों की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं होता। आगे ऐसी घटनाओं में यात्रियों को सही जानकारी और जागरूकता देने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि सिर्फ वीडियो देखकर गलत निष्कर्ष न निकाले जाएँ।
