CG Korea Recruitment Case: 36 अभ्यर्थियों की बहाली का आदेश, सरकार की समीक्षा याचिका खारिज…NV News
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बिलासपुर/(CG Korea Recruitment Case): छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कोरिया जिले की चर्चित संयुक्त भर्ती 2012 प्रकरण में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि, जिन 36 अभ्यर्थियों की नियुक्ति नकल प्रकरण का हवाला देकर रद्द की गई थी, उन्हें अगली सुनवाई से पहले नियुक्त किया जाए। इस फैसले से करीब 12 साल से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
दरअसल,हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार द्वारा की गई कार्रवाई को गंभीर त्रुटिपूर्ण बताते हुए कहा कि, जिन दस्तावेजों और सामग्री के आधार पर उम्मीदवारों को दोषी ठहराया गया, उनका पूरा मूल्यांकन नहीं किया गया था। कोर्ट ने यह भी माना कि, अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
मामला वर्ष 2012 की चतुर्थ श्रेणी संयुक्त भर्ती से जुड़ा है। कोरिया जिले में विभिन्न विभागों के चपरासी, चौकीदार और अन्य सहायक पदों के लिए एक संयुक्त परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 1100 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद चयनित उम्मीदवारों को नियमित रूप से पदस्थ भी कर दिया गया था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और नकल के आरोपों के आधार पर मेरिट लिस्ट में शामिल 36 अभ्यर्थियों को अचानक नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
सरकार की ओर से दावा किया गया कि, जांच समिति की रिपोर्ट में इन 36 अभ्यर्थियों को अनुचित साधनों का उपयोग करते पाया गया था। जबकि अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि, समिति ने न तो उनका बयान लिया और न ही आरोपों का आधार बताया। रिपोर्ट केवल अनुमान और संदेहों पर आधारित थी।
करीब दस साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने 1 जुलाई 2024 को नकल के आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। अदालत ने माना कि, समिति की रिपोर्ट अविश्वसनीय है और अभ्यर्थियों को बिना किसी ठोस प्रमाण के दोषी ठहराया गया। इस आदेश में 36 अभ्यर्थियों को दोषमुक्त करते हुए उनकी नियुक्ति बहाल करने के निर्देश भी शामिल थे।
हालाँकि राज्य सरकार इस फैसले से संतुष्ट नहीं थी और उसने डिवीजन बेंच में समीक्षा याचिका दायर कर सिंगल बेंच के आदेश पर पुनर्विचार की मांग की। सरकार ने तर्क दिया कि, जांच समिति की रिपोर्ट में अनियमितताओं के स्पष्ट संकेत मिले थे, इसलिए बहाली उचित नहीं होगी। वहीं दूसरी ओर, अभ्यर्थियों के पक्ष ने कहा कि, समिति की प्रक्रिया शुरुआत से ही पक्षपातपूर्ण थी और किसी भी उम्मीदवार को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया था।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने सरकार की समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि ,सिंगल बेंच का आदेश न्यायसंगत है। अदालत ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि, अगली सुनवाई, जो 28 नवंबर को निर्धारित है, उससे पहले सभी 36 अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर दी जाए।
हाई कोर्ट के इस फैसले ने उन अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगा दी है, जो एक दशक से अधिक समय से सरकारी नौकरी की बहाली का इंतजार कर रहे थे। सरकार की ओर से आगे कोई कदम उठाया जाएगा या नहीं, यह आगामी सुनवाई में स्पष्ट होगा, लेकिन कोर्ट का रुख अभ्यर्थियों के पक्ष में साफ दिखाई देता है।
