CG हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अविवाहित शहीद जवान की मां भी पेंशन की हकदार, कोर्ट ने खारिज किए तकनीकी नियम…NV News

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मानवीय संवेदनाओं और न्याय की मिसाल पेश करते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई जवान देश सेवा करते हुए शहीद हो जाता है और वह अविवाहित है, तो उसकी माता को पेंशन और अन्य सरकारी लाभ पाने का पूर्ण कानूनी अधिकार है। कोर्ट ने विभाग की उन तकनीकी दलीलों को खारिज कर दिया है जो अब तक इस हक की राह में रोड़ा बनी हुई थीं।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला एक शहीद जवान की बुजुर्ग मां से जुड़ा था, जिसे विभाग द्वारा यह कहकर पेंशन देने से मना किया जा रहा था कि नियमों के तहत शहीद का विवाहित होना या आश्रितों की श्रेणी में तकनीकी खामियां थीं। न्याय की गुहार लेकर मां ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में कहा गया था कि बेटे की शहादत के बाद वह आर्थिक रूप से पूरी तरह बेसहारा हो गई है।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी और आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि शहादत का सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि शहीद के परिवार के संरक्षण में दिखना चाहिए। कोर्ट ने कहा:

“एक मां जिसने अपना बेटा देश के लिए खो दिया, उसे पेंशन के लिए दफ्तरों के चक्कर कटवाना न्यायसंगत नहीं है। अविवाहित शहीद की मां उसकी सबसे बड़ी कानूनी उत्तराधिकारी और आश्रित है।”

अधिकारियों को जल्द भुगतान के निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता महिला की पेंशन फाइल को तत्काल मंजूरी दी जाए और अब तक का सारा बकाया (Arrears) ब्याज सहित भुगतान किया जाए। इस फैसले से प्रदेश के कई अन्य परिवारों को भी राहत मिलने की उम्मीद है जो इसी तरह की कानूनी पेचीदगियों में फंसे हुए हैं।

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