CG High Court: पति के अवैध संबंध पर आत्महत्या मामला: हाईकोर्ट ने कहा—नैतिक रूप से गलत
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बिलासपुर। CG High Court, पति के कथित अवैध संबंध से परेशान होकर पत्नी द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत हो सकते हैं, लेकिन जब तक आत्महत्या के लिए सीधा और स्पष्ट उकसावा साबित न हो, तब तक धारा 306 IPC लागू नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पति और उसकी महिला मित्र को दोषमुक्त कर दिया।
क्या था पूरा मामला
Suicide Case Verdict, अभियोजन के अनुसार, कुंती की शादी वर्ष 2011 में रवि कुमार गायकवाड से हुई थी। विवाह के बाद संतान न होने, कम दहेज और अशिक्षित होने को लेकर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए। इसके अलावा पति के एक महिला मित्र से अवैध संबंध होने की बात भी सामने आई।
4 जून 2017 को कुंती की मौत हो गई, जिसके बाद पति और उसकी महिला मित्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध दर्ज किया गया।
सत्र न्यायालय में क्या हुआ
Suicide Case Verdict, सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष प्रताड़ना या आत्महत्या के लिए उकसावे से जुड़े ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। अदालत ने माना कि आरोप साबित नहीं हुए हैं और इसी आधार पर पति और उसकी गर्लफ्रेंड को दोषमुक्त कर दिया गया।
यह फैसला 22 जुलाई 2022 को महासमुंद सत्र न्यायालय द्वारा सुनाया गया।
हाईकोर्ट में अपील खारिज
Suicide Case Verdict, दोषमुक्ति के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय श्याम अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि
Suicide Case Verdict, “केवल अवैध संबंध होने मात्र से आत्महत्या के लिए उकसावा नहीं माना जा सकता। IPC की धारा 306 के तहत दोषसिद्धि के लिए प्रत्यक्ष उकसावा, गंभीर मानसिक क्रूरता और ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।”
सुसाइड नोट पर अदालत की टिप्पणी
Suicide Case Verdict, हाईकोर्ट के समक्ष मृतका द्वारा छोड़ा गया डायरी नोट भी प्रस्तुत किया गया। अदालत ने कहा कि नोट से यह स्पष्ट होता है कि मृतका पति से प्रेम करती थी और महिला मित्र से नाराज थी, लेकिन कहीं भी प्रत्यक्ष उकसावे या गंभीर प्रताड़ना का उल्लेख नहीं है।
हाईकोर्ट का अंतिम निष्कर्ष
हाईकोर्ट ने कहा कि
Suicide Case Verdict, “अवैध संबंध नैतिक रूप से गलत हो सकते हैं, लेकिन जब तक आत्महत्या से उनका सीधा और स्पष्ट संबंध सिद्ध न हो, धारा 306 IPC लागू नहीं होती।”
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।
