CG High Court: बेटे की परवरिश का बोझ मां पर, मिलेगा 5 लाख गुजारा भत्ता…NV News
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बिलासपुर/(CG High Court): छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के विवाद से जुड़े एक अहम मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए तलाक को सही ठहराया है। रायपुर निवासी बैंक कर्मचारी ने अपनी पत्नी, जो सरकारी लाइब्रेरियन हैं, पर गंभीर आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी। पति का कहना था कि उसकी पत्नी उसे बार-बार ‘पालतू चूहा’ कहकर अपमानित करती थी, गर्भपात के लिए मजबूर करती थी और खुद को चोट पहुंचाकर तनावपूर्ण माहौल बनाती थी। वहीं, पत्नी ने पलटवार करते हुए पति पर शराबखोरी, गाली-गलौज और आर्थिक-भावनात्मक उपेक्षा के आरोप लगाए।
शादी के एक साल बाद रिश्तों में खटास:
दोनों की शादी 2009 में हुई थी। शादी के एक साल बाद बेटे का जन्म हुआ। लेकिन बच्चे के जन्म के कुछ ही समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद गहराने लगे। पति का आरोप था कि पत्नी बच्चे के जन्म के बाद भी गर्भवती हुई, लेकिन उसने बार-बार गर्भपात के लिए दबाव बनाया। इतना ही नहीं, वह खुद को चोट पहुंचाकर गर्भनाल तक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती थी। पति के अनुसार, पत्नी अक्सर उसे ‘पालतू चूहा’ कहती थी, जिससे उसका आत्मसम्मान आहत होता था।अगस्त 2010 में पत्नी मायके चली गई और तब से वापस नहीं लौटी। इसके बाद पति ने अदालत में तलाक की अर्जी दायर की।
पत्नी का पक्ष-पति नशे में रहता और करता था गाली-गलौज:
पत्नी ने सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि उसका पति नशे का आदी है और अक्सर गाली-गलौज करता था। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति और ससुराल वाले उसे भावनात्मक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करते थे और घर में अपनापन नहीं दिखाते थे। पत्नी ने वैवाहिक अधिकार बहाली की याचिका भी लगाई, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट का फैसला–मानसिक क्रूरता और परित्याग साबित:
मामले की सुनवाई जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने माना कि गवाहों के बयान और क्रॉस एग्जामिनेशन में सामने आए तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि, पत्नी ने वैवाहिक कर्तव्यों का पालन नहीं किया। अगस्त 2010 से अलग रहना परित्याग की श्रेणी में आता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि बार-बार अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना और वैवाहिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसलिए निचली अदालत का तलाक का आदेश पूरी तरह सही है।बेटे की परवरिश का बोझ मां पर,5 लाख गुजारा भत्ता मिलेगा।
