CG High court: हाईवे किनारे अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव ने दिया शपथपत्र, जनसुरक्षा से समझौता नहीं

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बिलासपुर। राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और हाईवे किनारे अवैध निर्माण को लेकर हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। अवैध ढाबा और शराब दुकान के संचालन से जुड़े मामले में मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन को व्यक्तिगत रूप से शपथपत्र प्रस्तुत करना पड़ा। शुक्रवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि जनसुरक्षा से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जाएगा।

 

आदेशों की अवहेलना पर कोर्ट की नाराजगी

कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 की पिछली सुनवाई में पाया था कि पूर्व आदेशों के बावजूद हाईवे किनारे बना अवैध ढाबा जस का तस मौजूद है और शराब दुकान का स्थानांतरण भी नहीं किया गया। कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए मुख्य सचिव से जवाब तलब किया था।

 

17 दिसंबर को हटाया गया अवैध ढाबा

मुख्य सचिव द्वारा दाखिल शपथपत्र में बताया गया कि 17 दिसंबर 2025 को सरकारी भूमि पर बने अवैध ढाबे को हटा दिया गया है और कार्रवाई का पंचनामा तैयार किया गया है। शासन ने स्पष्ट किया कि ढाबा संचालक को स्वयं हटाने का अवसर दिया गया था, लेकिन समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन ने बलपूर्वक ढाबा हटाया।

 

शराब दुकान को 30 दिन की राहत

शपथपत्र में यह भी बताया गया कि हाईवे किनारे स्थित शराब दुकान को अभी 30 दिनों की मोहलत दी गई है। प्रशासन ने इसे अन्यत्र स्थानांतरित करने का आश्वासन दिया है। मुख्य सचिव ने कहा कि जनजीवन की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और शराब दुकान का स्थानांतरण प्राथमिक आधार पर किया जाएगा।

 

ब्लैक स्पॉट पर बढ़े सुरक्षा इंतजाम

शराब दुकान वाला क्षेत्र दुर्घटना संभावित ‘ब्लैक स्पॉट’ घोषित है। फिलहाल वहां रंबल स्ट्रिप्स, रेडियम वार्निंग लाइट, ‘गो स्लो’ साइन बोर्ड, सोलर ब्लिंकर और रिफ्लेक्टिव रोड स्टड लगाए गए हैं। शपथपत्र में दावा किया गया कि इन उपायों के बाद जुलाई 2024 की तुलना में जुलाई 2025 में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में कमी आई है।

 

अन्य मार्गों की स्थिति पर भी चिंता

हाईकोर्ट ने सीपत-बालोदा-कोरबा मार्ग और रायपुर-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की खराब हालत पर भी चिंता जताई है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सड़क की खामियों को तत्काल दूर किया जाए और फॉग व स्मॉग के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

 

कोर्ट कमिश्नर की सिफारिशें

कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में कई अहम इंजीनियरिंग सुधार सुझाए गए हैं, जिन्हें 7 दिनों के भीतर लागू करने का आदेश दिया गया है। इनमें एंटी-फॉग डेलिनेटर्स और कैट्स आई, हर 5 मीटर पर रिफ्लेक्टिव रोड स्टड, मीडियन कट व तीखे मोड़ों पर सोलर ब्लिंकर, पुलों व बिजली पोल पर रिफ्लेक्टिव टेप, फॉग डिटेक्शन सेंसर और वीएमएस बोर्ड की स्थापना शामिल है।

 

फिर से मांगा गया शपथपत्र

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी को अगली सुनवाई से पहले ताजा शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि किन निर्देशों का पालन हो चुका है और आगे की कार्ययोजना क्या होगी। कोर्ट ने दो टूक कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी।

 

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