CG High court: पदोन्नति में मनमानी पर हाई कोर्ट सख्त, कहा– मूक दर्शक नहीं बन सकता न्यायालय

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बिलासपुर। पदोन्नति के मामलों में विभागीय अफसरों की लापरवाही और मनमानी रवैये को लेकर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जब किसी कर्मचारी को नियोक्ता की अस्पष्ट देरी और मनमानी के कारण उसके वैध पदोन्नति और वरिष्ठता अधिकारों से वंचित किया जाता है, तब न्यायालय मूक दर्शक नहीं बन सकता।

जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने यह टिप्पणी भारत सरकार के जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी सालिकराम चंद्राकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

 

रिटायर कर्मचारी को मिलेगा काल्पनिक पदोन्नति का लाभ

हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि चूंकि याचिकाकर्ता 30 अगस्त 2023 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें वास्तविक वेतन बकाया नहीं मिलेगा, लेकिन विभाग उनकी संशोधित वरिष्ठता के आधार पर पेंशन, वेतन निर्धारण और सेवानिवृत्ति लाभों की पुनर्गणना करेगा।

 

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता सालिकराम चंद्राकर ने अधिवक्ता स्वाति वर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने मांग की थी कि उन्हें 07 मई 2012 से वरिष्ठता लाभ देते हुए 08 अगस्त 2022 से सहायक अनुसंधान अधिकारी के पद पर पदोन्नत माना जाए।

याचिकाकर्ता रुद्री (धमतरी) में तटबंध निरीक्षक के पद पर पदस्थ थे। इससे पहले वे प्रयोगशाला सहायक ग्रेड-बी के पद पर कार्यरत थे।

 

नियमों के बावजूद हुई अनदेखी

विभागीय नियमों के अनुसार—

तटबंध निरीक्षक के 25% पद पदोन्नति से भरे जाने थे

इनमें 50% प्रयोगशाला सहायक और 50% प्रयोगशाला तकनीशियन कैडर से

11 फरवरी 2011 को जारी वरिष्ठता सूची में याचिकाकर्ता को अपने वरिष्ठ सुरेंद्र कुमार तिवारी के ठीक नीचे रखा गया था। इसके बावजूद 07 मई 2012 को केवल सुरेंद्र तिवारी को पदोन्नति दी गई और याचिकाकर्ता को नजरअंदाज कर दिया गया।

 

‘पद खाली नहीं’ का बहाना निकला गलत

विभाग ने 25 अक्टूबर 2014 को याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन यह कहकर खारिज कर दिया कि पद उपलब्ध नहीं हैं। जबकि रिकॉर्ड से साफ हुआ कि पद उपलब्ध थे और कोटा नियमों का उल्लंघन किया गया।

करीब 10 साल बाद, 01 फरवरी 2019 को याचिकाकर्ता को पदोन्नति दी गई, जिससे उन्हें वरिष्ठता का भारी नुकसान हुआ।

 

कनिष्ठों को मिली तरक्की, वरिष्ठ पीछे छूटे

08 सितंबर 2022 को याचिकाकर्ता के कनिष्ठ रिनू टोप्पो और अरुण कुमार टंडन को सहायक अनुसंधान अधिकारी पद पर पदोन्नति दे दी गई, जबकि याचिकाकर्ता को न पदोन्नति मिली और न ही वरिष्ठता लाभ।

 

RTI के बाद हाई कोर्ट पहुंचा मामला

याचिकाकर्ता ने 04 नवंबर 2022 को RTI दायर कर जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मजबूर होकर उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट ने कहा—

“कोई भी प्रशासनिक प्राधिकरण अपनी गलती का फायदा नहीं उठा सकता। बाद में लागू किया गया आरक्षण रोस्टर, पहले की गई अवैधता को सही नहीं ठहरा सकता।”

कोर्ट ने विभागीय अफसरों के रवैये को मनमाना, असंवैधानिक और प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताया।

 

हाई कोर्ट के अहम आदेश

  • 3 मई 2012 की DPC में याचिकाकर्ता पर विचार न करना अवैध घोषित
  • याचिकाकर्ता को 07 मई 2012 से पदोन्नत माना जाएगा
  • तटबंध निरीक्षक कैडर में काल्पनिक वरिष्ठता दी जाएगी
  • संशोधित वरिष्ठता के आधार पर पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ पुनः तय होंगे
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