CG High court: अलग-अलग वकीलों से रिव्यू याचिका दायर करना पड़ा भारी, हाई कोर्ट ने लगाई 50 हजार की लागत
Share this
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग और गलत कानूनी परंपरा अपनाने पर सख्त रुख अपनाते हुए एक याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बिना पूर्व अधिवक्ता की सहमति लिए अलग-अलग चरणों में नए वकीलों की नियुक्ति कर रिव्यू याचिका दायर करना उचित नहीं है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि याचिकाकर्ता ने एक ही मामले में हाई कोर्ट की अलग-अलग बेंच और सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने के लिए हर स्तर पर अलग-अलग अधिवक्ताओं को नियुक्त किया, वह भी पूर्व अधिवक्ता की अनुमति के बिना।
कोर्ट ने इस प्रवृत्ति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बार की स्वस्थ परंपरा के विपरीत है और इससे न्यायिक समय की बर्बादी होती है। सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिव्यू याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने अनुचित मानते हुए खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता संजय यादव को विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर चार वार्षिक वेतन वृद्धि रोके जाने की सजा दी गई थी। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने 2018 में रिट याचिका दायर की थी, जिसे सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया। इसके बाद दायर रिट अपील और सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी भी खारिज हो चुकी थी।
रिव्यू याचिका पर सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि रिव्यू को अपील की तरह दोबारा मेरिट पर सुनवाई का जरिया नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए रिव्यू दायर नहीं किया जा सकता कि याचिकाकर्ता फैसले से असहमत है।
डिवीजन बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की तुच्छ और गलत रिव्यू याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं। कोर्ट ने इसे गलत परंपरा बताते हुए रिव्यू याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
