“CG Electricity Subsidy”:बिजली का झटका,हाफ स्कीम बंद,100 यूनिट पर सब्सिडी…NV News 

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के लाखों घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को सितंबर से बड़ा झटका लगने वाला है। पिछले छह सालों से लोगों को बिजली बिल पर मिल रही 400 यूनिट तक की सब्सिडी अब समाप्त कर दी गई है। राज्य सरकार ने ‘‘बिजली बिल हाफ’’ योजना में संशोधन करते हुए इसका दायरा घटा दिया है। अब केवल वे उपभोक्ता ही आधे बिल की राहत पा सकेंगे जिनकी मासिक खपत 100 यूनिट तक है। यानी, 101 यूनिट से अधिक खर्च करने वालों को पूरी रकम चुकानी होगी।

क्या था पुराना नियम?:

भूपेश बघेल सरकार ने 2018 में ‘‘बिजली बिल हाफ’’ योजना लागू की थी। इसके तहत 400 यूनिट तक की खपत वाले उपभोक्ताओं को आधा बिल देना पड़ता था। इस स्कीम से लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिली थी। गरीब और मध्यमवर्गीय घरों में बिजली का खर्च लगभग आधा हो गया था। उदाहरण के लिए, यदि किसी परिवार का 400 यूनिट का बिल 2,400 रुपये आता था, तो छूट के बाद उन्हें करीब 1,200 रुपये ही देने पड़ते थे।

अब क्या बदला?:

वर्तमान साय सरकार ने अगस्त से इस योजना में बड़ा बदलाव किया है। नई व्यवस्था के मुताबिक:

• 100 यूनिट तक खपत पर 50% छूट मिलेगी।

• 101 यूनिट से ज्यादा खपत पर पूरी रकम देनी होगी।

• 400 यूनिट तक की छूट पूरी तरह खत्म।

• इस बदलाव का सीधा असर सितंबर में आने वाले बिल पर दिखेगा। जिन उपभोक्ताओं को अब तक 558 रुपये से लेकर 1,223 रुपये तक की बचत हो रही थी, उन्हें यह राहत नहीं मिलेगी।

क्यों किया गया बदलाव?:

बिजली कंपनियों का कहना है कि ‘‘बिजली बिल हाफ’’ योजना से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हो रहा था। लाखों उपभोक्ताओं को दी जा रही सब्सिडी का बोझ सीधे सरकार पर पड़ रहा था। राज्य सरकार का तर्क है कि अब सब्सिडी केवल गरीब और न्यूनतम खपत करने वाले परिवारों तक सीमित करनी होगी, ताकि राजकोष पर दबाव न बढ़े।

दरों में बढ़ोतरी का डबल झटका:

सब्सिडी खत्म होने के साथ ही उपभोक्ताओं को एक और बोझ झेलना पड़ेगा। सरकार ने 1 जुलाई से बिजली की दरों में भी इजाफा किया है। यानी, अब प्रति यूनिट की कीमत पहले से ज्यादा है। ऐसे में, जिन परिवारों ने अगस्त की उमस भरी गर्मी में ज्यादा कूलर और एसी चलाए, उन्हें सितंबर में दोगुना-तिगुना बिल भरना पड़ सकता है।

किस पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?:

• इस फैसले का सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर होगा।

• गरीब परिवार:जिनकी खपत 100 यूनिट से ऊपर जाती है, उन्हें पूरी रकम चुकानी होगी।

• मध्यवर्गीय उपभोक्ता: कूलर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और पंखे चलाने पर खपत आसानी से 200-400 यूनिट तक पहुंच जाती है। पहले उन्हें आधा बिल देना पड़ता था, अब पूरी रकम चुकानी होगी।

• ग्रामीण उपभोक्ता: गांवों में भी बिजली की खपत बढ़ रही है, जिससे किसानों और छोटे दुकानदारों पर असर होगा।

उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया:

कई उपभोक्ताओं ने इसे ‘‘जनता पर सीधा बोझ’’ बताया है।

• रायपुर की गृहिणी मीना वर्मा कहती हैं,‘‘पहले हमारा बिजली बिल करीब 900 रुपये आता था, अब वही बिल 1,800 रुपये से ज्यादा का हो जाएगा। परिवार का बजट बिगड़ जाएगा।’’

• दुर्ग के व्यापारी राजेश अग्रवाल का कहना है,‘‘400 यूनिट तक की छूट ने आम लोगों को बड़ी राहत दी थी। अब यह खत्म होने से खर्च बढ़ेगा। सरकार को गरीब और मध्यवर्ग के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।’’

राजनीतिक मायने:

इस फैसले ने राजनीतिक हलचल भी बढ़ा दी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार आम जनता से किया गया वादा तोड़ रही है। कांग्रेस ने इस बदलाव को ‘‘गरीब विरोधी’’ करार दिया है और दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकार की योजना ने लाखों परिवारों को राहत दी थी। वहीं, भाजपा सरकार का कहना है कि योजनाएं ‘‘वास्तविक जरूरतमंदों’’ तक सीमित होनी चाहिए और राज्य को घाटे से बचाना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ में ‘‘बिजली बिल हाफ’’ योजना का दायरा घटाकर 400 यूनिट से 100 यूनिट कर देना लाखों उपभोक्ताओं के लिए बड़ी चिंता का विषय है। पहले जहां मध्यमवर्गीय परिवारों को भी राहत मिलती थी, अब यह सुविधा केवल न्यूनतम खपत करने वाले उपभोक्ताओं तक सीमित हो गई है। दरों में हालिया वृद्धि ने इस बोझ को और बढ़ा दिया है।

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