“CG Education”: जानें 2026-27 से कौन सी कक्षाओं का बदलेगा सिलेबस…NV News

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NV News:छत्तीसगढ़ के स्कूलों में पढ़ाई का ढांचा आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदलने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत राज्य सरकार ने कक्षा 4वीं, 5वीं, 7वीं और 8वीं के लिए नए पाठ्यक्रम तैयार करने का फैसला लिया है। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने किताबों के लेखन का काम शुरू कर दिया है। नई किताबें शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगी।

कब और क्यों हो रहा बदलाव?:

भारत सरकार ने वर्ष 2020 में नई शिक्षा नीति लागू की थी। इस नीति का मकसद छात्रों का समग्र विकास करना और उन्हें केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए जीवनोपयोगी कौशल से जोड़ना है। इसके तहत देशभर के स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से बदलाव किए जा रहे हैं।इस साल छत्तीसगढ़ में कक्षा 1 से 3 और 6वीं की किताबें बदली गई हैं।अब अगला चरण 2026-27 में लागू होगा, जिसमें 4वीं, 5वीं, 7वीं और 8वीं के विद्यार्थी नई किताबों से पढ़ाई करेंगे।

कैसी होंगी नई किताबें?:

नई पाठ्यपुस्तकें NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) के दिशा-निर्देशों के आधार पर बनाई जा रही हैं। किताबों में आधुनिक विज्ञान, तकनीक, भारतीय संस्कृति और स्थानीय परंपराओं का संतुलन देखने को मिलेगा।

उदाहरण के तौर पर कक्षा 5 की हिंदी पुस्तक ‘वीणा’ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, गगनयान मिशन और गंगा नदी की जानकारी के साथ राजा विक्रमादित्य व राजा भोज जैसी ऐतिहासिक कहानियां भी शामिल की गई हैं। यानी छात्र एक ही किताब से विज्ञान, इतिहास, साहित्य और संस्कृति के बारे में जान सकेंगे।

नई शिक्षा नीति में क्या नया?:

एनईपी-2020 केवल किताबें बदलने तक सीमित नहीं है। इसका फोकस छात्रों को होलिस्टिक एजुकेशन (Holistic education) देना है। इसलिए पाठ्यक्रम में कई नई चीजें जोड़ी गई हैं:-

कक्षा 3 : शारीरिक शिक्षा और योग को शामिल किया गया।

कक्षा 6 : योग, कला शिक्षा और व्यावसायिक शिक्षा जोड़ी गई।

आने वाली कक्षाएँ : छात्रों को कला, खेल और तकनीक का संतुलित ज्ञान मिलेगा।

इन बदलावों का उद्देश्य बच्चों को सिर्फ रटने से निकालकर सोचने-समझने और वास्तविक जीवन से जोड़ने की दिशा में ले जाना है।

संस्कृति और परंपरा पर जोर:

राज्य सरकार ने खास ध्यान दिया है कि किताबों में छत्तीसगढ़ की स्थानीय संस्कृति और पर्वों का प्रतिनिधित्व हो। छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने के लिए लोककथाएं, त्योहार और परंपराएं भी पाठ्यपुस्तकों में शामिल होंगी। इससे बच्चों में न केवल जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि अपनी संस्कृति पर गर्व करने की भावना भी मजबूत होगी।

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान:

छत्तीसगढ़ का पाठ्यक्रम अब राष्ट्रीय स्तर पर भी जगह बना रहा है। एनसीईआरटी (NCERT) ने एससीईआरटी(SCERT) द्वारा लिखी गई कविता ‘कविता का कमाल’ को अपनी कक्षा 4 की हिंदी पुस्तक ‘वीणा’ में शामिल किया है। यह कविता फिलहाल राज्य की कक्षा 3 की किताब का हिस्सा है। इससे यह साबित होता है कि राज्य का शैक्षणिक कामकाज अब राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त कर रहा है।

शिक्षकों को भी दी जा रही ट्रेनिंग:

नई किताबें तभी प्रभावी होंगी जब शिक्षक उन्हें पढ़ाने के लिए तैयार होंगे। इसी कारण राज्य सरकार शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दे रही है। उन्हें नई शिक्षा नीति की अवधारणाओं, पढ़ाने की नई तकनीकों और छात्रों को प्रैक्टिकल ज्ञान देने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

छात्रों के लिए फायदे:

नई किताबें और पाठ्यक्रम आने से छात्रों को कई लाभ होंगे:-

1.समग्र विकास:केवल किताबों तक सीमित न रहकर खेल, कला, योग और तकनीक का भी ज्ञान।

2.आधुनिक विषयों से परिचय: एआई, स्पेस मिशन और टेक्नोलॉजी की जानकारी छोटी कक्षाओं से ही।

3.संस्कृति से जुड़ाव:स्थानीय और राष्ट्रीय परंपराओं का अध्ययन।

4.भविष्य के लिए तैयारी: व्यावसायिक शिक्षा और जीवनोपयोगी कौशल से करियर विकल्प मजबूत होंगे।

क्या कहते हैं अधिकारी?:

एससीईआरटी(NCERT) के अतिरिक्त संचालक जे.पी. रथ का कहना है–“राज्य में नई शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। किताबों का लेखन कार्य चल रहा है और शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में छात्र एक बेहतर और आधुनिक पाठ्यक्रम से पढ़ाई करेंगे।”

छत्तीसगढ़ में शिक्षा प्रणाली तेजी से बदल रही है। एनईपी-2020 (NEP 2020) के तहत बन रही नई किताबें छात्रों को न केवल पढ़ाई बल्कि जीवन कौशल, तकनीकी समझ और संस्कृति से भी जोड़ेंगी। 2026-27 से शुरू होने वाला यह बदलाव बच्चों को एक नए दौर की पढ़ाई की ओर ले जाएगा, जहाँ वे सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम बनने के लिए पढ़ेंगे।

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