CG Big: “मैं गद्दार नहीं,बदलती परिस्थितियों ने करवाया आत्मसमर्पण”- रेड कमांडर भूपति का बयान…NV News
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जगदलपुर/बस्तर(CG Big): एक समय बस्तर के सबसे खतरनाक नक्सल नेताओं में गिने जाने वाले डेढ़ करोड़ रुपए के इनामी नक्सली मोजुल्ला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने आखिरकार हथियार डाल दिए। सरकार के सामने आत्मसमर्पण के बाद भूपति ने कहा कि संगठन के कुछ लोग उसे गद्दार बता रहे हैं, लेकिन वह खुद को गद्दार नहीं मानता। उसने कहा कि,”मैंने परिस्थितियों के बदलने के कारण यह फैसला लिया है। अब हिंसा से कुछ हासिल नहीं होगा।”
भूपति ने आत्मसमर्पण के बाद जारी एक वीडियो संदेश में अपने विचार खुले तौर पर रखे। उसने कहा कि, जिस रास्ते पर वह अब तक चला, वह रास्ता अब बेमानी हो चुका है। “जंगल में बंदूक उठाने का मकसद अन्याय के खिलाफ लड़ाई था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। लोगों की सोच बदल रही है। अब विकास और संवाद ही आगे का रास्ता है,” भूपति ने कहा।
60 साथियों के साथ डाला हथियार:
भूपति के साथ संगठन के करीब 60 नक्सलियों ने भी समर्पण किया। यह सभी दक्षिण बस्तर के इलाकों में सक्रिय थे। प्रशासन का कहना है कि,यह अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण है, जिसने नक्सली संगठन को अंदर तक हिला दिया है।
बस्तर रेंज के आईजी ने बताया कि भूपति पिछले दो दशकों से बस्तर में सक्रिय था और उसके नाम पर कई बड़े हमले दर्ज हैं। उस पर सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट और अपहरण जैसी वारदातों में शामिल होने के आरोप हैं।
भूपति की कहानी,छात्र से बना माओवादी कमांडर:
आंध्रप्रदेश के रहने वाले मोजुल्ला वेणुगोपाल राव ने अपनी पढ़ाई के दौरान ही संगठन से जुड़ाव शुरू किया था। बताया जाता है कि उसने छात्र संगठन के माध्यम से माओवादी विचारधारा अपनाई और धीरे-धीरे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया।
बस्तर में उसकी पहचान एक सख्त और रणनीतिक कमांडर के रूप में थी। उसने नक्सली संगठन में कई नई रणनीतियाँ लागू कीं और लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना रहा।
जानें,क्यों किया आत्मसमर्पण:
वीडियो संदेश में भूपति ने कहा कि उसने हाल के वर्षों में महसूस किया कि नक्सल आंदोलन का स्वरूप बदल चुका है। “पहले लोगों का समर्थन था, लेकिन अब ग्रामीण भी शांति और विकास चाहते हैं। हमारी विचारधारा लोगों की जरूरतों से मेल नहीं खा रही थी,” उसने कहा।
उसने आगे बताया कि जंगलों में अब हथियार उठाना सिर्फ खून-खराबे की राह है, जिससे आदिवासी समाज को ही नुकसान हो रहा है। “मैंने यह कदम अपने लोगों की भलाई के लिए उठाया है,” भूपति ने कहा।
सरकार का रुख और पुनर्वास योजना:
छत्तीसगढ़ सरकार ने भूपति और उसके साथियों के आत्मसमर्पण का स्वागत किया है। अधिकारियों ने बताया कि सभी surrendered नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षा, आवास और आर्थिक सहायता दी जाएगी।
गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सरकार की नीति स्पष्ट है-जो हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनका स्वागत है। भूपति जैसे बड़े नाम का आत्मसमर्पण यह संदेश देता है कि अब जंगलों में हिंसा की जगह संवाद का दौर लौट रहा है।”
नक्सल संगठन में मची हलचल:
भूपति के आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन के भीतर भारी असंतोष फैल गया है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कमेटी के नेताओं ने इसे “विश्वासघात” बताया है। वहीं, कई स्थानीय कमांडरों में डर और अनिश्चितता का माहौल है।सुरक्षा एजेंसियां मान रही हैं कि भूपति के कदम से आने वाले महीनों में और भी कई नक्सली सरेंडर कर सकते हैं।
भूपति ने अपने वीडियो के अंत में कहा, “मैं अब अपनी बाकी जिंदगी समाज की सेवा में बिताना चाहता हूं। जिन हथियारों ने अब तक जानें लीं, अब मैं उन्हीं हाथों से लोगों की जिंदगी सुधारना चाहता हूं।”
बस्तर के इतिहास में यह सरेंडर न केवल एक बड़ा मोड़ है, बल्कि इस बात का संकेत भी कि हिंसा की जगह संवाद और विकास की सोच धीरे-धीरे मजबूत हो रही है।

