CG Assembly Budget Session: छत्तीसगढ़ के 16 लाख किसानों ने सरेंडर किया धान का रकबा, मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में दी जानकारी…NV News

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कृषि एवं खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने प्रदेश के किसानों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। सदन में एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि राज्य के 16 लाख से अधिक किसानों ने धान की खेती के लिए निर्धारित अपने रकबे (खेती योग्य भूमि) में से कुछ हिस्से का समर्पण कर दिया है। यह जानकारी प्रदेश की कृषि नीति और किसानों के रुझान को समझने के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है।

2.16 लाख हेक्टेयर रकबा किया गया सरेंडर

मंत्री बघेल ने आधिकारिक आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि कुल 16 लाख 40 हजार किसानों ने अपनी मर्जी से 2 लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबे का समर्पण किया है। आमतौर पर रकबा समर्पण की प्रक्रिया तब होती है जब किसान उस विशेष भूमि पर धान के बजाय अन्य फसलें उगाना चाहते हैं या संबंधित भूमि पर खेती की स्थिति बदल गई हो। सरकार के मुताबिक, यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और किसानों की सहमति पर आधारित है।

विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार ने दी सफाई

सदन में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस भी देखने को मिली। विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासन की सख्ती या तकनीकी खामियों के कारण किसानों का रकबा कम हुआ है। हालांकि, मंत्री दयालदास बघेल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह किसी दबाव में नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि गिरदावरी (फसल सर्वेक्षण) के बाद वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही रकबे में यह बदलाव दर्ज किया गया है।

कृषि विविधीकरण की ओर बढ़ता कदम?

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में रकबा समर्पण इस बात का भी संकेत हो सकता है कि छत्तीसगढ़ के किसान अब केवल धान पर निर्भर न रहकर अन्य नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। सरकार द्वारा मोटे अनाज (मिलेट्स) और अन्य बागवानी फसलों को दिए जा रहे प्रोत्साहन का असर भी इस आंकड़े में झलक सकता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि इस समर्पित भूमि का उपयोग किस प्रकार की फसलों के उत्पादन के लिए किया जाता है।

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