सीडी कांड: सेशन कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे भूपेश बघेल, बोले- ‘सत्य की होगी जीत’…NV News

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रायपुर सेशन कोर्ट द्वारा ‘सेक्स सीडी कांड’ में दोबारा मुकदमा चलाने के आदेश के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अब उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। बघेल के कानूनी सलाहकारों ने मामले का अध्ययन शुरू कर दिया है और जल्द ही सेशन कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका बिलासपुर हाई कोर्ट में दायर की जाएगी। इस कदम से छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

सेशन कोर्ट के फैसले पर सवाल

भूपेश बघेल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि सेशन कोर्ट का फैसला चौंकाने वाला है, क्योंकि इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त (डिस्चार्ज) कर दिया था। बघेल के अनुसार, जब निचली अदालत ने साक्ष्यों की कमी और कानूनी बारीकियों को देखते हुए फैसला सुनाया था, तो उसे पलटना न्यायसंगत नहीं लगता। इसी आधार पर वे अब हाई कोर्ट से राहत की उम्मीद कर रहे हैं ताकि इस ट्रायल पर रोक लग सके।

राजनीतिक बदले की भावना का आरोप

भूपेश बघेल ने इस पूरी कानूनी प्रक्रिया को केंद्र और राज्य की सत्ताधारी भाजपा सरकार की राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि विपक्ष की आवाज को दबाने और उनकी छवि धूमिल करने के लिए सालों पुराने मामले को राजनीतिक द्वेष के चलते फिर से कुरेदा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन अन्याय के खिलाफ हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।

सत्य की जीत का विश्वास

पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों में बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि 2017 में भी वे डरे नहीं थे और आज भी वे किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि हाई कोर्ट में मामले के कानूनी तथ्यों को सही तरीके से रखे जाने पर उन्हें निश्चित रूप से न्याय मिलेगा।

छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल

इस घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस पूरी तरह से भूपेश बघेल के समर्थन में उतर आई है। पार्टी इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है, वहीं भाजपा ने इसे न्याय प्रक्रिया का हिस्सा करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि हाई कोर्ट से बघेल को राहत नहीं मिलती है, तो उन्हें नियमित अदालती कार्यवाही और पेशियों का सामना करना पड़ेगा, जिसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

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