परिंदों को मिला ‘नया आसमान’: मांझे से टूटी पक्षियों के पंखों की हड्डियां अब ‘पिन’ से जुड़ेंगी; तोते पर सफल सर्जरी के बाद जगी नई उम्मीद…NV News
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रायपुर: पतंगबाजी में इस्तेमाल होने वाले कांच युक्त धागे यानी मांझे की चपेट में आकर हर साल हजारों पक्षी अपने पंख गंवा देते हैं या दम तोड़ देते हैं। ऐसे ही घायल पक्षियों को फिर से उड़ने लायक बनाने के लिए रायपुर के पशु चिकित्सकों ने एक कमाल की तकनीक विकसित की है। इस तकनीक में मांझे से क्षतिग्रस्त हुई पंखों की सूक्ष्म हड्डियों को एक विशेष ‘पिन’ (Pinning Technique) के जरिए जोड़ा जाता है। हाल ही में एक तोते पर यह प्रयोग किया गया, जिसके पंख मांझे से बुरी तरह कटकर लटक गए थे। जटिल सर्जरी के बाद पिन की मदद से उसकी हड्डियों को फिक्स किया गया, और परिणाम सुखद रहे।
डॉक्टरों के अनुसार, पक्षियों की हड्डियां खोखली और बेहद नाजुक होती हैं, इसलिए उन पर पारंपरिक प्लास्टर या भारी रॉड का इस्तेमाल करना असंभव होता है। नई तकनीक में हड्डियों के भीतर एक अत्यंत पतली और हल्की सर्जिकल पिन डाली जाती है, जो टूटे हुए हिस्सों को आपस में जोड़कर रखती है। तोते के मामले में देखा गया कि कुछ ही हफ्तों में उसकी हड्डियां प्राकृतिक रूप से जुड़ गईं और वह फिर से फड़फड़ाने में सक्षम हो गया। यह प्रयोग उन पक्षियों के लिए वरदान साबित होगा जिन्हें पंख कटने के कारण उम्र भर पिंजरे में रहना पड़ता था।
इस सफलता के बाद, पशु चिकित्सा विभाग और जीव संरक्षण संस्थाएं अब इस तकनीक का विस्तार करने की योजना बना रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर घायल पक्षी को समय रहते (गोल्डन आवर में) अस्पताल लाया जाए, तो इस पिनिंग सर्जरी के जरिए उसके उड़ने की संभावना 90% तक बढ़ जाती है। रायपुर की इस पहल ने न केवल चिकित्सा जगत को नई दिशा दी है, बल्कि ‘बेजुबानों’ के प्रति संवेदनशीलता की एक बड़ी मिसाल भी पेश की है। अब मांझे से घायल चील, कबूतर और अन्य पक्षियों का भी इसी पद्धति से इलाज किया जा सकेगा।
