बिलासपुर में बड़ा जमीन घोटाला: विधवा की जमीन का मुआवजा हड़प गया पड़ोसी; राजस्व विभाग की मिलीभगत का आरोप…NV News

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न्यायधानी बिलासपुर से एक चौंकाने वाला जमीन घोटाला सामने आया है, जहाँ एक बेसहारा विधवा महिला की जमीन के सरकारी मुआवजे पर जालसाजों ने डाका डाल दिया। मिली जानकारी के अनुसार, महिला की पैतृक जमीन शासन द्वारा किसी सार्वजनिक परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। नियमतः इसका मुआवजा सीधे भूमि स्वामी यानी उस विधवा महिला के खाते में जाना था, लेकिन सरकारी कागजों में हेरफेर कर लाखों रुपये का यह मुआवजा उसके पड़ोसी को वितरित कर दिया गया। इस घटना ने प्रशासनिक सतर्कता और पारदर्शिता के दावों की पोल खोल दी है।

राजस्व विभाग के अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप

इस पूरे घोटाले में राजस्व विभाग के पटवारी और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। पीड़ित महिला का आरोप है कि बिना उसकी जानकारी के दस्तावेजों में नाम बदल दिए गए या पड़ोसी को ही वारिस या हकदार दर्शा दिया गया। बिना भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के इतनी बड़ी राशि का भुगतान किसी अन्य व्यक्ति को कर दिया जाना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। महिला पिछले कई महीनों से दफ्तरों के चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी सुनवाई के बजाय उसे केवल आश्वासन ही मिल रहा है।

फर्जीवाड़े का तरीका: कागजों में खेल और बैंक खातों का मायाजाल

प्रारंभिक जांच और सूत्रों के हवाले से पता चला है कि जालसाजों ने फर्जी वंशावली या सहमति पत्र तैयार कर प्रशासन को गुमराह किया। मुआवजे की फाइल को इतनी तेजी से पास कराया गया कि असली मालिक को भनक तक नहीं लगी। जब महिला को बैंक से या नोटिस के जरिए सूचना मिली कि उसकी जमीन अधिग्रहित हो चुकी है और पैसा बंट चुका है, तब इस करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश हुआ। पड़ोसी द्वारा रची गई इस साजिश में स्थानीय बिचौलियों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

कलेक्टर तक पहुँचा मामला: जांच की उठी मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित विधवा महिला ने अब बिलासपुर कलेक्टर और संभागायुक्त से न्याय की गुहार लगाई है। सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर करते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने और मुआवजे की राशि वापस वसूल कर पीड़िता को दिलाने की मांग की है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक टीम गठित करने का भरोसा दिया है। अब देखना यह होगा कि क्या दोषी अधिकारियों पर गाज गिरेगी या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा।

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