बिलासपुर रेल हादसा: सिग्नल नेग्लिजेंसी की आशंका, लोको पायलट से सीआरएस टीम ने की पूछताछ — जांच जारी
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बिलासपुर:- बिलासपुर के लालखदान क्षेत्र में 4 नवंबर को हुई रेल दुर्घटना को लेकर उच्च स्तरीय जांच जारी है। रेलवे की सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की टीम लगातार मौके का निरीक्षण कर रही है और विभिन्न तकनीकी पहलुओं से तथ्यों को एकत्र कर रही है। अभी जांच पूरी नहीं हुई है, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट में सिग्नल नेग्लिजेंसी (संकेत उपेक्षा) की बात सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, लोको पायलट ने मुख्य ट्रैक के रेड सिग्नल को नजरअंदाज कर बगल की लाइन पर दिख रहे यलो सिग्नल को फॉलो किया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि ट्रैक के घुमावदार हिस्से के कारण लोको पायलट को भ्रम हुआ और उसने गलत सिग्नल को फॉलो कर लिया।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मेमू ट्रेन हादसे से कुछ दूरी पहले तक 76 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ रही थी। जब लोको पायलट को स्थिति की गंभीरता का अंदाज़ा हुआ, तब उसने इमरजेंसी ब्रेक लगाया, जिससे ट्रेन की गति घटकर 48 किमी प्रति घंटा रह गई। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते ब्रेक नहीं लगाया जाता, तो हादसा और भी भयावह रूप ले सकता था।
गुरुवार को सीआरएस की टीम ने घायल सहायक लोको पायलट रश्मि राज सहित अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों से पूछताछ की। जांच अधिकारी सभी तथ्यों की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। रेलवे प्रशासन फिलहाल अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर टिप्पणी करने से बच रहा है। रेलवे सूत्रों के अनुसार, हादसे की असली वजह तकनीकी गड़बड़ी या मानवीय त्रुटि में से कौन-सी रही, यह सीआरएस की अंतिम रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो पाएगा।
