बीजापुर मुठभेड़: 50 लाख का इनामी कमांडर पापाराव ढेर! सुरक्षाबलों ने माओवाद के ‘अजेय दुर्ग’ को ढहाया…
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बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। खबरों के अनुसार, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) के सदस्य और 50 लाख रुपये के इनामी कुख्यात कमांडर पापाराव को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। यह मुठभेड़ बीजापुर के सीमावर्ती जंगलों में हुई, जहाँ नक्सलवाद की कमर तोड़ने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत जवानों ने माओवादियों के सुरक्षित ठिकाने को चारों ओर से घेर लिया था।
पापाराव माओवादी संगठन का एक ऐसा चेहरा था, जो दशकों से बस्तर संभाग में खौफ का पर्याय बना हुआ था। वह 2010 के ताड़मेटला हमले (जिसमें 76 जवान शहीद हुए थे) समेत कई बड़ी हिंसक वारदातों का मास्टरमाइंड माना जाता था। तेलंगाना भाजपा के नेताओं ने भी इस बड़ी सफलता की पुष्टि करते हुए इसे सुरक्षाबलों की ऐतिहासिक जीत बताया है। पापाराव की मौत से माओवादी संगठन का सूचना तंत्र और सैन्य ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है, क्योंकि वह हिडमा के बाद क्षेत्र का सबसे प्रभावशाली रणनीतिकार था।
मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, जिनमें AK-47 और वायरलेस सेट शामिल हैं, बरामद किए गए हैं। बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर डीआरजी (DRG), एसटीएफ (STF) और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। हालांकि अधिकारिक तौर पर पापाराव की शिनाख्त की प्रक्रिया अभी अंतिम चरण में है, लेकिन मुठभेड़ के बाद माओवादी खेमे में मची हलचल इस बड़े नुकसान की पुष्टि कर रही है।
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मार्च 2026 तक देश से माओवाद को जड़ से खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में यह सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। पापाराव के मारे जाने से न केवल बस्तर, बल्कि पड़ोसी राज्यों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी माओवादी गतिविधियां सीमित हो जाएंगी। फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है और सुरक्षाबल इस बात की जांच कर रहे हैं कि पापाराव के साथ और कौन से बड़े कैडर मौजूद थे।
