डिजिटल सट्टेबाजी पर भिलाई पुलिस का प्रहार: व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर खिला रहे थे जुआ, 7 आरोपी गिरफ्तार, मोबाइल और नकदी जब्त…NV News
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भिलाई/दुर्ग: दुर्ग जिले की पुलिस ने अवैध जुआ और सट्टा कारोबारियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है। भिलाई के स्थानीय बाजार क्षेत्र में खुलेआम सट्टा खिलाने और व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए दांव लगवाने वाले 7 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मुखबिर की सूचना पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से हजारों रुपये की नकदी और सट्टेबाजी में इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि भिलाई के कुछ इलाकों में सट्टा कारोबारी अब पारंपरिक तरीके के बजाय डिजिटल माध्यमों का सहारा ले रहे हैं। आरोपी ‘व्हाट्सऐप ग्रुप’ बनाकर लोगों को जोड़ते थे और वहीं पर दांव के अंक तय किए जाते थे। पुलिस ने जाल बिछाकर घेराबंदी की और उस समय छापेमारी की जब बाजार में लेनदेन और अंकों का मिलान चल रहा था।
कार्रवाई के मुख्य विवरण:
गिरफ्तारी और बरामदगी: पुलिस ने मौके से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 23 हजार रुपये नकद और 7 महंगे स्मार्टफोन जब्त किए गए हैं, जिनमें सट्टे के लेन-देन के रिकॉर्ड मिले हैं।
व्हाट्सऐप का मायाजाल: जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी टेलीग्राम और व्हाट्सऐप पर सीक्रेट ग्रुप बनाकर सट्टा ऑपरेट कर रहे थे ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें। ग्रुप में हार-जीत के स्क्रीनशॉट और पैसों के लेन-देन का हिसाब रखा जाता था।
बाजार में दहशत और सट्टा: आरोपी स्थानीय बाजार में सक्रिय थे, जिससे आम व्यापारियों और ग्राहकों को परेशानी होती थी। पुलिस की इस दबिश के बाद बाजार क्षेत्र के अन्य सटोरियों में हड़कंप मच गया है।
पुलिस की टीम: इस पूरी कार्रवाई को स्थानीय थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। पुलिस अब ग्रुप के एडमिन और मुख्य सरगना की तलाश कर रही है जो इन लड़कों को कमीशन पर काम करवा रहा था।
कड़ी कानूनी कार्रवाई: सभी आरोपियों के खिलाफ ‘छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022’ (नया कानून) के तहत मामला दर्ज किया गया है। नए कानून के तहत ऑनलाइन सट्टा खिलाने वालों पर सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
दुर्ग एसपी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिले में किसी भी प्रकार का अवैध कारोबार संचालित नहीं होने दिया जाएगा। पुलिस अब उन बैंक खातों और यूपीआई आईडी (UPI ID) की भी जांच कर रही है, जिनके जरिए सट्टे के पैसों का ट्रांजेक्शन किया जाता था।
