Bharatmala Scam: 12 खसरों में 43 करोड़ की लूट, तो बाकी 57 पर चुप्पी क्यों? क्या रसूखदारों को बचा रही है EOW?…NV News

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे में हुए ‘महाघोटाले’ की गूंज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने रायपुर के अभनपुर ब्लॉक के अंतर्गत केवल 12 खसरा नंबरों की जांच में ही 43.18 करोड़ रुपये के गबन का खुलासा किया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कुल 69 संदिग्ध खसरों में से शेष 57 खसरों की जांच फाइलों में क्यों दबी हुई है? विपक्ष और जानकारों का आरोप है कि यदि बाकी 57 खसरों की निष्पक्ष जांच हुई, तो घोटाले का आंकड़ा 350 करोड़ रुपये को भी पार कर सकता है।

जांच की सुस्ती और उठते सवाल

EOW ने अक्टूबर 2025 में 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों की पहली चार्जशीट तो दाखिल कर दी, लेकिन इसके बाद जांच की रफ्तार सुस्त पड़ गई है:

ED की एंट्री ने बढ़ाई हलचल: दिसंबर 2025 के अंत में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रायपुर और महासमुंद के 10 ठिकानों पर छापेमारी कर 40 लाख कैश और डिजिटल सबूत जब्त किए। ईओडब्ल्यू की सुस्ती के बीच ईडी की सक्रियता बताती है कि मामला कितना गंभीर है।

अधिकारियों पर कार्रवाई में हिचक: इस घोटाले में अब तक केवल छोटे स्तर के राजस्व कर्मियों और दलालों पर ही गाज गिरी है। उन उच्चाधिकारियों और सफेदपोशों पर हाथ डालने से ईओडब्ल्यू क्यों कतरा रही है, जिनके संरक्षण में यह ‘सिंडिकेट’ फल-फूल रहा था?

फर्जीवाड़े का मास्टर प्लान: जांच में खुलासा हुआ कि बड़ी जमीनों को बैक-डेट में छोटे टुकड़ों में बांटकर (Artificial Splitting) करोड़ों का अतिरिक्त मुआवजा हड़पा गया। यहाँ तक कि सरकारी जलाशयों की जमीन को भी निजी बताकर पैसे निकाल लिए गए।

 

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