बस्तर के ‘हरे सोने’ पर बेमौसम बारिश और दीमक की मार: कांकेर में संग्रहण केंद्रों पर हजारों गड्डियां बर्बाद, शासन को बड़े नुकसान की आशंका…NV News
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NV News- कांकेर: बस्तर संभाग में “हरा सोना” कहे जाने वाले तेंदूपत्ता के संग्रहण का काम इन दिनों जोरों पर है, लेकिन कुदरत की मार और प्रशासनिक लापरवाही ने संग्राहकों और शासन की चिंता बढ़ा दी है। जिले के विभिन्न संग्रहण केंद्रों में बेमौसम बारिश की वजह से हजारों गड्डियां भीग गई हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि नमी के कारण अब इन पत्तों में दीमक का प्रकोप शुरू हो गया है, जिससे तेंदूपत्ते की गुणवत्ता पूरी तरह नष्ट होने की कगार पर है।
तेंदूपत्ता संग्राहक कड़ी मेहनत कर जंगल से पत्तों की तोड़ाई कर रहे हैं और उन्हें फड़ों (संग्रहण केंद्रों) तक पहुँचा रहे हैं। लेकिन बारिश से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण खुले में रखीं गड्डियां गीली हो गई हैं। भीगने के बाद धूप निकलने पर पत्तों में कालापन आने लगता है और नमी के कारण दीमक के झुंड बंडलों को चाटने लगे हैं। यदि समय रहते इन भीगे हुए पत्तों का वैज्ञानिक तरीके से सुखाने या उपचार करने का प्रबंध नहीं किया गया, तो करोड़ों रुपये का यह ‘हरा सोना’ कचरे में तब्दील हो जाएगा।
इस स्थिति से न केवल सरकार को राजस्व की भारी हानि होने की आशंका है, बल्कि संग्राहकों को मिलने वाले बोनस और लाभांश पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। स्थानीय ग्रामीणों और जानकारों का कहना है कि संग्रहण केंद्रों पर तिरपाल और ऊंचे चबूतरों की व्यवस्था में कमी के कारण हर साल इस तरह की समस्या आती है। फिलहाल, दीमक के प्रकोप ने वन विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा दी है, और अब भीगे हुए स्टॉक को बचाने के लिए आनन-फानन में प्रयास किए जा रहे हैं।
