बस्तर में नक्सलवाद पर प्रहार: 108 माओवादियों ने किया ऐतिहासिक आत्मसमर्पण, भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद…NV News
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- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान ‘पुना नारकोम’ (नई सुबह) को आज एक बड़ी सफलता मिली है। जगदलपुर के लालबाग स्थित पुलिस समन्वय केंद्र में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में 108 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इन आत्मसमर्पित माओवादियों में कई इनामी नक्सली और महिला कैडर भी शामिल हैं। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर इन्होंने समाज के साथ जुड़ने का संकल्प लिया है।
इस आत्मसमर्पण के साथ ही पुलिस ने बस्तर के जंगलों से बरामद विस्फोटकों और हथियारों के एक विशाल जखीरे (नक्सल डंप) का भी प्रदर्शन किया। अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है, जिसमें आईईडी (IED), भारी मात्रा में बारूद, डेटोनेटर और अन्य युद्ध सामग्री शामिल है। माओवादियों द्वारा दी गई सटीक सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने इन गुप्त ठिकानों को ध्वस्त किया, जिससे भविष्य में होने वाली बड़ी घटनाओं को समय रहते टाल दिया गया।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है। आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक सदस्य को शासन की पुनर्वास नीति के तहत तात्कालिक सहायता राशि प्रदान की गई है। इसके साथ ही उनके आवास, शिक्षा और स्वरोजगार के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है ताकि वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकें।
इस सामूहिक आत्मसमर्पण ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है और अंदरूनी इलाकों में सक्रिय अन्य कैडरों के लिए एक कड़ा संदेश भेजा है। बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने अन्य नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा छोड़ें और सरकार की ‘पुना नारकोम’ पहल का हिस्सा बनें। इस आयोजन में स्थानीय आदिवासी समुदाय के प्रमुखों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की, जो क्षेत्र में लौटती शांति और विश्वास का प्रतीक है।
