PM मोदी के ‘पुलिस की छवि सुधारें’ संदेश के बाद छत्तीसगढ़ में बवाल! RTI विशेषज्ञ कुणाल शुक्ला ने क्या कहा?

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रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 60वें DGP-IGP सम्मेलन में “पुलिस की जन-छवि सुधारने” की अपील के कुछ ही घंटे बाद छत्तीसगढ़ में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के चर्चित RTI विशेषज्ञ कुणाल शुक्ला के तीखे सोशल मीडिया पोस्ट ने पूरे पुलिस महकमे को कठघरे में ला खड़ा कर दिया है।

शुक्ला ने एक्स (Twitter) पर लिखते हुए सवाल उठाया—

“मोदी जी की बात सही है… पर पुलिस की छवि सुधरे भी तो कहाँ से और कैसे?

इसके बाद उन्होंने कई गंभीर आरोपों की सूची गिनाई, जिसने सोशल मीडिया में बहस छेड़ दी।

 

कुणाल शुक्ला का सीधा वार— “जब अफसर ही सट्टा-जुआ चलवा रहे हों…”

RTI विशेषज्ञ ने पुलिस पर कड़े सवाल उठाते हुए लिखा—

“जब कुछ अफसर अपने संरक्षण में जुआ-सट्टा चलवा रहे हों…”

“जब महादेव सट्टा ऐप से करोड़ों की प्रोटेक्शन मनी दबाई जा रही हो…”

“जब अधिकारी अवैध शराब, अवैध खनन और विवादित जमीन सौदों में खुद दलाल बनकर घूम रहे हों…”

और अंत में उनकी तीखी टिप्पणी ने विवाद को और भड़का दिया—

“अब ऐसी हालत में छवि कौन-सा फ़ोटोशॉप सुधार लेगा?”

इस टिप्पणी के बाद पुलिस महकमे में हलचल और सोशल मीडिया में चर्चा की आग और तेज हो गई।

सोशल मीडिया पर बड़ा सवाल— “किस जिले के एसपी पर निशाना?”

शुक्ला के पोस्ट वायरल होते ही लोगों ने सीधे सवाल दागने शुरू कर दिए—

“छत्तीसगढ़ का महादेव भक्त IPS कौन है?”

“किस जिले के एसपी सट्टा माफिया को संरक्षण दे रहे हैं— नाम लो!”

“पुलिस संरक्षण के बिना गलत काम खिल नहीं सकते!”

कुछ यूज़र्स ने दावा किया कि कई जिलों में सट्टा कारोबार पुलिस की छत्रछाया में ही पनप रहा है।

शुक्ला ने नाम नहीं लिया, लेकिन इशारे समझे जा रहे…

भले ही RTI विशेषज्ञ कुणाल शुक्ला ने किसी जिले या अधिकारी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके आरोपों ने कई जगह उंगलियाँ उठवा दी हैं—

वे जिले जहाँ जुआ-सट्टा रैकेट के खूब चर्चे रहे हैं,

वे क्षेत्र जहा अवैध खनन और शराब माफिया पर पुलिस की मिलीभगत के आरोप लगते आए हैं, और वे इलाके जहाँ विवादित जमीन सौदों में पुलिस अफसरों की भूमिका की फुसफुसाहट आम रही है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शुक्ला का इशारा एक ऐसे जिले के एसपी की ओर है, जिन पर लंबे समय से अनौपचारिक रूप से सट्टा कारोबार को ढाल देने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

 

राज्य में नई बहस— क्या पुलिस की छवि सुधारना वाकई चुनौती है?

PM मोदी के संदेश के बाद पुलिस सुधार को लेकर चर्चाएँ शुरू ही हुई थीं कि RTI विशेषज्ञ के इस पोस्ट ने सवालों का नया तूफान खड़ा कर दिया है—

क्या छत्तीसगढ़ में पुलिस की छवि वाकई संकट में है?

क्या जुआ-सट्टा और अवैध कारोबार में पुलिस की भूमिका पर पारदर्शी जांच की जरूरत है?

क्या शुक्ला का आरोप किसी बड़े खुलासे की शुरुआत है?

इन सवालों के बीच पुलिस विभाग और सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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