Bastar Dussehra Tradition: बस्तर दशहरा की 618 साल पुरानी परंपरा, दंतेवाड़ा से जगदलपुर के लिए निकली मां दंतेश्वरी की पावन डोली, दर्शन को उमड़ा भारी जनसैलाब…NV News
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NV News: छत्तीसगढ़ की विश्वप्रसिद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत बस्तर दशहरा का मुख्य और सबसे रोमांचक चरण शुरू हो चुका है। अष्टमी के खास मौके पर मां दंतेश्वरी की पावन डोली और छत्र अपनी पारंपरिक भव्यता के साथ दंतेवाड़ा स्थित मुख्य मंदिर से जगदलपुर के लिए रवाना किए गए। इस 618 साल पुरानी गौरवशाली परंपरा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।
दंतेवाड़ा से जगदलपुर की इस धार्मिक यात्रा की शुरुआत के दौरान जिया परिवार के सदस्यों और पुजारियों ने पूरी आस्था और विधि-विधान के साथ मां दंतेश्वरी की डोली को अपने कंधों पर उठाया। डोली के प्रस्थान के वक्त दंतेवाड़ा के डंकिनी पुल और आसपास के इलाकों में भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि सड़क के दोनों किनारों पर पैर रखने की जगह नहीं बची। श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब दिखे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
बस्तर दशहरा अपनी अनूठी और सदियों पुरानी रीतियों के लिए पूरी दुनिया में विशेष स्थान रखता है। मां दंतेश्वरी की डोली के जगदलपुर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया जाता है, जिसके बाद दशहरा पर्व के विभिन्न पारंपरिक अनुष्ठान और रथ परिक्रमा का मुख्य सिलसिला जोर पकड़ता है। इस ऐतिहासिक आयोजन को लेकर बस्तर संभाग के कोने-कोने से आए लोगों में गजब का उत्साह और उल्लास देखने को मिल रहा है।

