Chhattisgarh Forest News: 3.67 करोड़ पौधारोपण से बढ़ी हरियाली, बाघों की संख्या 18 से बढ़कर 35 हुई…NV News
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Chhattisgarh Forest News रायपुर, 1 सितंबर 2026। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार “हरित छत्तीसगढ़–समृद्ध छत्तीसगढ़” के संकल्प के साथ वन संरक्षण और वनवासियों के आर्थिक सशक्तिकरण को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल जंगलों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वनवासियों की आय बढ़ाना, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों को वृक्षारोपण से जोड़ना, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करना तथा वन्यजीवों का संरक्षण भी इसमें शामिल है। मंत्री ने ये बातें छत्तीसगढ़ संवाद में आयोजित पत्रकार वार्ता में वन विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहीं।
62 हजार एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि में 3.67 करोड़ पौधों का रोपण
मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के जरिए वृक्षारोपण को किसानों की आय से जोड़ा जा रहा है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को 5 एकड़ तक 100 प्रतिशत और 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि पर 3.675 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया है।
तेंदूपत्ता संग्राहकों को 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान
वनोपज संग्राहकों की आय बढ़ाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों ने 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया, जिसके लिए 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। वहीं 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ रुपये प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया।
राजमोहिनी देवी सुरक्षा योजना के तहत 1,862 प्रकरणों में 26.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के 8,533 विद्यार्थियों को 12.07 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति भी दी गई है।
70 हजार से ज्यादा लोगों को वनोपज आधारित आजीविका का लाभ
महिला स्व-सहायता समूहों को भी लघु वनोपज आधारित गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री जनजाति विकास मिशन और PM JANMAN के अंतर्गत संग्रहण एवं प्रसंस्करण गतिविधियों से 6 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों के 70 हजार से ज्यादा सदस्य लाभान्वित हुए हैं।
बस्तर में वानिकी कार्यों से 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार
बस्तर के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद वन विभाग ने कई अति-संवेदनशील क्षेत्रों में वानिकी और विदोहन कार्य फिर शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर के दूरस्थ वन क्षेत्रों में इमारती लकड़ी और बांस विदोहन के कार्य किए जाएंगे।
इन गतिविधियों से इमारती लकड़ी विदोहन में करीब 19.26 लाख मानव-दिवस और बांस विदोहन में 2.41 लाख मानव-दिवस, यानी कुल 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और पलायन कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दूरस्थ वनांचलों में सड़क और मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार
PM JANMAN के तहत 20 प्रकरणों में 58.002 हेक्टेयर क्षेत्र और 99.995 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमति दी गई है। वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(2) के तहत 417 प्रकरणों में करीब 1,300 से 1,400 किलोमीटर मार्ग के लिए अनुमति जारी की गई है।
बीएसएनएल के 62 टावरों में से 59 टावरों को रिकॉर्ड 70 दिनों में अनुमति दी गई। पिछले ढाई वर्षों में स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, सड़क, बिजली, दूरसंचार और पेयजल सहित विभिन्न विकास कार्यों के लिए कुल 1,168 प्रकरणों में वनभूमि के विपथन की कार्रवाई की गई।
Tiger Conservation: छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या 35 पहुंची
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राज्य को महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। मंत्री के अनुसार वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ में 18 बाघ दर्ज किए गए थे, जिनकी संख्या वर्ष 2026 में बढ़कर 35 हो गई है। यह करीब 94 प्रतिशत की वृद्धि है।
वर्तमान संख्या में अचानकमार टाइगर रिजर्व में 18, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला में 7, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 6, भोरमदेव अभयारण्य में 3 और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक बाघ दर्ज किया गया है।
बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या भी 77 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है।
मानव-हाथी द्वंद्व कम करने तकनीक और जनभागीदारी
मानव-हाथी द्वंद्व को नियंत्रित करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ जैसी पहल की जा रही हैं। प्रदेश में 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता का काम कर रहे हैं।
मंत्री के मुताबिक वर्ष 2022-23 में हाथियों के कारण जनहानि के 76 मामले सामने आए थे, जो वर्ष 2025-26 में घटकर 53 रह गए हैं।
‘एक पेड़ मां के नाम’ में लक्ष्य से अधिक पौधारोपण
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वर्ष 2024 में 2.50 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 3.50 करोड़ और वर्ष 2025 में 1.65 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 3.55 करोड़ पौधों का रोपण एवं वितरण किया गया।
वर्ष 2026 में ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ के तहत 2.73 करोड़ पौधों के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 2 करोड़ 23 लाख 65 हजार पौधों का रोपण एवं वितरण किया जा चुका है।
Eco Tourism: 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र, धुड़मारास बना उदाहरण
प्रदेश में 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र विकसित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक केंद्र पूरी तरह स्वावलंबी हो चुके हैं। बस्तर का धुड़मारास सामुदायिक पर्यटन का प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां सालाना 38,391 पर्यटक पहुंच रहे हैं और स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बन रहे हैं।
जनजातीय संस्कृति और आस्था के संरक्षण के लिए पिछले ढाई वर्षों में 19.05 करोड़ रुपये खर्च कर 572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार किया गया है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 2025 में UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल किया गया। यहां 35 जिप्सी वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे करीब 200 स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।
कोपरा जलाशय बना प्रदेश का पहला रामसर साइट
बिलासपुर का कोपरा जलाशय छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है। Vision@2047 के तहत वर्ष 2030 तक प्रदेश में 20 रामसर साइट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही राज्य में 500 से अधिक वेटलैंड मित्र भी कार्यरत हैं।
डिजिटल हुआ वन प्रशासन, फायर अलर्ट का रिस्पॉन्स टाइम घटा
वन विभाग की भुगतान प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटाइज कर भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर और ई-कोष प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया गया।
आधुनिक फॉरेस्ट फायर अलर्ट एवं मॉनिटरिंग सिस्टम से आग की घटनाओं पर प्रतिक्रिया का समय भी 1-2 घंटे से घटकर 5-10 मिनट रह गया है।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जंगलों का संरक्षण तभी स्थायी हो सकता है, जब वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी उसका प्रत्यक्ष लाभ मिले। सरकार वन संरक्षण के साथ वनवासियों की आय, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, युवाओं के रोजगार, किसानों की आय और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण पर एक साथ काम कर रही है। “प्रकृति भी, प्रगति भी” की सोच के साथ ईको-टूरिज्म और “हरित छत्तीसगढ़–समृद्ध छत्तीसगढ़” के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जा रहा है।

