छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था ठप! संविलियन की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे अतिथि शिक्षक, मिला कांग्रेस का साथ….NV News

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NV News दुर्ग/रायपुर, 3 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में नए शिक्षण सत्र की शुरुआत के साथ ही सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं चरमराने की आशंका पैदा हो गई है। ‘प्रांतीय अतिथि शिक्षक विद्यामितान कल्याण संघ’ के बैनर तले प्रदेशभर के अतिथि शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव के गृह जिले दुर्ग सहित प्रदेश के सभी जिलों में कार्यरत अतिथि शिक्षक आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।

अतिथि शिक्षकों ने अपनी मुख्य मांग ‘संविलियन’ (Regularization) को लेकर ‘कलमबंद हड़ताल’ का आह्वान किया है। इस बड़े आंदोलन के कारण ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के शासकीय स्कूलों में शैक्षणिक कार्य पूरी तरह प्रभावित होने की स्थिति निर्मित हो गई है।

शिक्षा मंत्री के गृह जिले से आंदोलन की हुंकार

इस आंदोलन की सबसे बड़ी गूंज स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के गृह क्षेत्र दुर्ग में देखने को मिल रही है। हड़ताली शिक्षकों का साफ कहना है कि वे लंबे समय से पूरी निष्ठा के साथ प्रदेश के बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा उनकी आजीविका और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अपनी मांगों को लेकर अड़े अतिथि शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि जब तक शासन स्तर पर उनकी मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन या आदेश जारी नहीं होता, तब तक यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

हड़ताल को मिला मुख्य विपक्षी दल ‘कांग्रेस’ का समर्थन

अतिथि शिक्षकों के इस आंदोलन को अब राजनीतिक हवा भी मिल गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को अतिथि शिक्षकों की जायज मांगों पर तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए बातचीत करनी चाहिए। विपक्ष के इस समर्थन के बाद यह मामला अब और अधिक गरमा गया है, जिससे आने वाले दिनों में सरकार पर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

क्या हैं अतिथि शिक्षकों की मुख्य मांगें?

नियमितीकरण/संविलियन: लंबे समय से कार्यरत सभी अतिथि शिक्षकों (विद्यामितानों) का शिक्षा विभाग में संविलियन किया जाए।

सेवा सुरक्षा की गारंटी: किसी भी अतिथि शिक्षक को बिना ठोस कारण या बीच सत्र में सेवा से पृथक न किया जाए।

मानदेय में वृद्धि: बढ़ती महंगाई को देखते हुए वर्तमान मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी की जाए।

स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता: राज्य के कई शासकीय स्कूलों, विशेषकर बस्तर और सरगुजा संभाग के दूरस्थ अंचलों में, अतिथि शिक्षकों के भरोसे ही पढ़ाई का जिम्मा रहता है। ऐसे में कड़कड़ाती बारिश और नए सत्र के शुरुआती दिनों में शिक्षकों की इस हड़ताल से विद्यार्थियों की पढ़ाई का भारी नुकसान होने की चिंता पालकों और शिक्षाविदों को सताने लगी है।

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