Yoga Day Special: मुंगेली के विवेक पिछले 15 साल से जगा रहे योग की अलख, 40 ट्रेनर्स तैयार कर रामकिंकर की टीम 3 जगहों पर दे रही मुफ्त ट्रेनिंग…NV News

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NV News- Yoga Day Special (अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष): ‘पहला सुख निरोगी काया’ की कहावत को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर अंचल के मुंगेली, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) क्षेत्र में कुछ युवा सच कर दिखा रहे हैं। 21 जून को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया, लेकिन मुंगेली के रहने वाले योग गुरु विवेक केशरवानी और उनके सहयोगी रामकिंकर सिंह के लिए योग केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि पिछले डेढ़ दशक से उनके जीवन का मुख्य मिशन बन चुका है। पिछले 15 वर्षों से लगातार बिना किसी स्वार्थ के लोगों को योग सिखा रहे विवेक केशरवानी ने क्षेत्र में एक ऐसी स्वास्थ्य क्रांति की शुरुआत की है, जिसने हजारों लोगों की जिंदगी बदल दी है। उनके इस भगीरथ प्रयास का ही नतीजा है कि आज उनके द्वारा तैयार किए गए 40 पेशेवर योग प्रशिक्षक (ट्रेनर्स) और रामकिंकर सिंह की समर्पित टीम अलग-अलग 3 केंद्रों पर समाज के हर वर्ग को योग की मुफ्त ट्रेनिंग दे रही है।

इस सेवा यात्रा की शुरुआत की कहानी बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक है। साल 2011 में जब विवेक केशरवानी ने योग सिखाने का बीड़ा उठाया था, तब उनके साथ केवल 4 लोग जुड़े थे। शुरुआती दिनों में लोगों को योग के प्रति जागरूक करना और उन्हें सुबह-सुबह मैदान तक लाना एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन विवेक के अटूट संकल्प और योग के चमत्कारी फायदों को देखकर धीरे-धीरे लोग इस मुहिम से जुड़ते चले गए। साल 2011 के उस छोटे से पौधे ने आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले लिया है। आंकड़ों की बात करें तो विवेक अब तक 130 से अधिक लोगों को योग का कड़ा और पेशेवर प्रशिक्षण दे चुके हैं। उनकी सबसे बड़ी सफलता यह है कि उन्होंने केवल लोगों को योग सिखाया ही नहीं, बल्कि उनमें से 40 लोगों को इस काबिल बना दिया कि वे आज खुद दूसरों को योग सिखाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

विवेक केशरवानी की इस मुहिम को धरातल पर और आगे बढ़ाने का काम किया रामकिंकर सिंह परिहार और उनकी टीम ने। रामकिंकर सिंह ने साल 2017 से योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाया और इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज रामकिंकर की अगुवाई में यह टीम मुंगेली और आसपास के 10 से अधिक सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में योग शिविरों का संचालन कर रही है। इस टीम की सबसे खास और सराहनीय बात यह है कि ये लोग समाज के उस पिछड़े और अंतिम तबके तक पहुंच रहे हैं, जहां आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद सीमित हैं। यह टीम विशेष रूप से बैगा आदिवासी बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के बीच जाकर उन्हें प्राणायाम, आसन और ध्यान की बारीकियां सिखा रही है, ताकि कुपोषण और बीमारियों से घिरे इन क्षेत्रों में लोग प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रह सकें।

कोरोना महामारी के उस भयानक दौर को कौन भूल सकता है जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी और लोग ऑक्सीजन व सांसों के संकट से जूझ रहे थे। उस संकट काल में विवेक केशरवानी और रामकिंकर की टीम ने लोगों के लिए ‘संजीवनी’ का काम किया। इस टीम ने डिजिटल माध्यमों और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लगातार योग और प्राणायाम के विशेष सत्र आयोजित किए। कोरोना काल के दौरान और उसके बाद हुए पोस्ट-कोविड कॉम्प्लिकेशंस (जैसे सांस लेने में तकलीफ, मानसिक तनाव और शारीरिक कमजोरी) से उबरने में इस टीम की योग क्लासेस ने सैकड़ों परिवारों की मदद की। इनके योग केंद्रों पर आने वाले कई असाध्य और पुराने मरीजों ने यह स्वीकार किया है कि नियमित योग, कपालभाति, और अनुलोम-विलोम करने से उनकी शुगर, ब्लड प्रेशर, जोड़ों का दर्द और माइग्रेन जैसी बीमारियां या तो पूरी तरह ठीक हो गईं या फिर नियंत्रण में आ गईं।

योग की यह अविरल धारा अब केवल मुंगेली शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि रामकिंकर की टीम वर्तमान में तीन अलग-अलग प्रमुख स्थानों पर नियमित रूप से ट्रेनिंग कैंप आयोजित कर रही है। इस पूरी मुहिम में विवेक केशरवानी के साथ-साथ महिला प्रशिक्षकों की भी एक बड़ी फौज तैयार हुई है, जो गृहणियों और युवतियों को योग के प्रति प्रेरित कर रही हैं। ग्रामीण अंचलों में योग के इस प्रसार से न केवल लोगों का शारीरिक स्वास्थ्य सुधर रहा है, बल्कि उनके भीतर एक सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार भी हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी 21 जून विश्व योग दिवस के मौके पर इस योग सेवा की जमकर तारीफ हो रही है और लोग इस पूरी टीम के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता और आभार व्यक्त कर रहे हैं।

आज के इस भागदौड़ भरे और तनावपूर्ण जीवन में जहां लोग महंगी दवाइयों और जिम के पीछे हजारों रुपए खर्च कर रहे हैं, वहीं मुंगेली की यह टीम नि:स्वार्थ भाव से प्राचीन भारतीय संस्कृति और ऋषि-मुनियों के ज्ञान (योग) को जन-जन तक पहुंचा रही है। विवेक केशरवानी और रामकिंकर सिंह की यह कहानी देश के हर नागरिक के लिए एक मिसाल है कि कैसे एक छोटा सा प्रयास समाज में इतना बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इस टीम का लक्ष्य आने वाले समय में बिलासपुर संभाग के हर एक गांव तक योग की इस मुफ्त सेवा को पहुंचाना है ताकि एक स्वस्थ और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जा सके।

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