नारायणपुर के बासीन गांव में ‘फलदार क्रांति’: 99% पौधे पाकर नया जीवन, किसानों की चमकेगी किस्मत!…NV News
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NV News- छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और उद्यान विभाग के समन्वय की एक बेहद खूबसूरत और अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है। जिले के ओरछा जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंदला के आश्रित ग्राम बासीन में किसानों की बंजर या कम उपजाऊ जमीनों को हरा-भरा करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए एक अनोखी मुहिम शुरू की गई थी। इसके तहत किसानों के खेतों में लगाए गए फलदार पौधों में से लगभग 99 प्रतिशत पौधे न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि पूरी तरह स्वस्थ भी पाए गए हैं। सरकारी योजनाओं के इतने सटीक और प्रभावी क्रियान्वयन ने ग्रामीण विकास का एक सफल मॉडल पेश किया है।
इस दूरदर्शी पहल के तहत मनरेगा की नर्सरी में उद्यान विभाग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड (कलमी) आम के पौधे तैयार किए गए थे। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इन पौधों का रोपण चयनित किसानों के खेतों में कराया गया। योजना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि प्रशासन ने सिर्फ पौधे बांटकर अपनी जिम्मेदारी खत्म नहीं की, बल्कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरे एक साल तक उनके रखरखाव की मजबूत व्यवस्था सुनिश्चित की। इसके साथ ही पौधों को मवेशियों और बाहरी नुकसान से बचाने के लिए उद्यान विभाग की ओर से किसानों को सामूहिक फेंसिंग (बाड़बंदी) का भी लाभ दिया गया।
हाल ही में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किए गए क्षेत्रीय निरीक्षण में जब 99 प्रतिशत पौधों के जीवित रहने की दर सामने आई, तो हर कोई दंग रह गया। इस सफलता के पीछे विभागीय तालमेल के साथ-साथ स्थानीय किसानों की सिंचाई और देखभाल में सक्रिय भागीदारी सबसे बड़ी वजह रही है। आने वाले कुछ ही वर्षों में जब इन पौधों से आम का उत्पादन शुरू होगा, तो किसानों को खेती के साथ-साथ एक बड़ी अतिरिक्त आय मिलने लगेगी। नारायणपुर का यह ‘बासीन मॉडल’ अब प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा बन चुका है, जो साबित करता है कि इच्छाशक्ति हो तो रोजगार के साथ हरियाली और समृद्धि दोनों हासिल की जा सकती है।

