महानदी जल विवाद पर ट्रिब्यूनल सख्त: छत्तीसगढ़ और ओडिशा को दी आखिरी चेतावनी, 2 मई तक रिपोर्ट तलब…NV News
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NV News– महानदी जल विवाद को लेकर गठित ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा सरकारों के ढुलमुल रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है। न्यायाधिकरण ने दोनों राज्यों को मामले के समाधान के लिए एक ‘आखिरी अवसर’ देते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि यदि 2 मई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक दोनों राज्य जल बंटवारे या विवादित मुद्दों पर कोई ठोस प्रस्ताव या सहमति रिकॉर्ड पर नहीं लाते हैं, तो ट्रिब्यूनल स्वयं मामले के गुण-दोष (Merits) के आधार पर फैसला सुनाना शुरू कर देगा।
न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि पिछले कई वर्षों से मामला लंबित होने के बावजूद दोनों राज्यों की ओर से कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया गया है। ट्रिब्यूनल ने टिप्पणी की कि राज्य सरकारों के वकील बार-बार स्थगन (Adjournment) की मांग कर रहे हैं, जबकि कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि अब समय की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आगामी सुनवाई तक अंतिम रूप से डेटा और सहमति का ब्यौरा सौंपना अनिवार्य है, ताकि दशकों से चले आ रहे इस अंतर-राज्यीय विवाद का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बांध और बैराज बनाने से निचले इलाकों में पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है, जिससे सिंचाई और पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वहीं, छत्तीसगढ़ का अपना पक्ष है। दोनों राज्यों के बीच इस मुद्दे पर पहले भी कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन अब ट्रिब्यूनल की इस सख्त चेतावनी के बाद दोनों राज्यों पर समाधान के लिए दबाव बढ़ गया है।

