भर्ती परीक्षाओं पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: पेपर लीक किया तो 1 करोड़ जुर्माना, नकलचियों को 5 साल की जेल…NV News

Share this

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कैबिनेट ने भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधली को रोकने के लिए देश के सबसे कड़े कानूनों में से एक को मंजूरी दे दी है। इस कानून का उद्देश्य उन लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना है जो दिन-रात मेहनत कर सरकारी नौकरी का सपना देखते हैं।

नए कानून के कड़े प्रावधान: एक नज़र में

अपराध की श्रेणी जेल की सजा आर्थिक जुर्माना

नकल करते पकड़े जाने पर (परीक्षार्थी) 3 से 5 साल तक ₹5 लाख तक

संगठित अपराध (पेपर लीक/रैकेट) 5 से 10 साल तक ₹1 करोड़ (न्यूनतम)

सेवा प्रदाता (Service Provider) की संलिप्तता 10 साल तक ₹1 करोड़ + परीक्षा का पूरा खर्च

प्रमुख बिंदु: जो आपको जानना जरूरी है

गैर-जमानती अपराध: पेपर लीक और नकल से जुड़े सभी अपराध अब गैर-जमानती (Non-Bailable) और संज्ञेय होंगे। यानी आरोपी को आसानी से बेल नहीं मिलेगी।

संपत्ति की कुर्की: संगठित अपराध या पेपर लीक में शामिल दोषियों की संपत्ति कुर्क कर परीक्षा में हुए नुकसान की भरपाई की जा सकती है।

संस्थानों पर प्रतिबंध: यदि कोई कोचिंग सेंटर या प्रिंटिंग प्रेस इसमें शामिल पाया जाता है, तो उसे हमेशा के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।

परीक्षार्थियों के लिए कड़ा संदेश: यदि कोई छात्र नकल करते या अनुचित साधनों का उपयोग करते पकड़ा जाता है, तो वह अगले 2 से 5 साल तक किसी भी सरकारी परीक्षा में बैठने के लिए अयोग्य (Debarred) घोषित कर दिया जाएगा।

क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत?

पिछले कुछ वर्षों में व्यापम (VYAPAM) और PSC जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतों ने युवाओं के भरोसे को तोड़ा था। सरकार का मानना है कि ₹1 करोड़ जैसे भारी-भरकम जुर्माने और लंबी जेल की सजा से अपराधियों के मन में खौफ पैदा होगा और “परीक्षा माफिया” का नेटवर्क ध्वस्त होगा।

Share this