बीमा कंपनी को तगड़ा झटका: चोरी हुए वाहन का क्लेम 10 साल तक रोका, अब 30 दिन में ₹10 लाख भुगतान का आदेश…NV News

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में उपभोक्ता फोरम ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी की मनमानी पर लगाम लगाई है। फोरम ने 10 साल पुराने वाहन चोरी के मामले में क्लेम रोकने को ‘सेवा में भारी कमी’ माना है। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने संबंधित बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित उपभोक्ता को 30 दिनों के भीतर ₹10 लाख (ब्याज और मुआवजे सहित) का भुगतान करे। इस फैसले ने उन हजारों पॉलिसी धारकों के लिए उम्मीद जगाई है, जिनके क्लेम तकनीकी कारणों या हीला-हवाली की वजह से सालों से लंबित हैं।

यह मामला एक ट्रक चोरी से जुड़ा है, जिसका क्लेम बीमा कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सूचना देने में देरी हुई और कागजी औपचारिकताएं अधूरी थीं। पीड़ित ने हार नहीं मानी और 10 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। फोरम ने अपनी टिप्पणी में कहा कि “बीमा कंपनी का उद्देश्य संकट के समय ग्राहक की मदद करना होना चाहिए, न कि तकनीकी खामियां निकालकर क्लेम को अनिश्चित काल के लिए लटकाना।” अदालत ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह वाहन की मूल बीमा राशि के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना और वाद व्यय भी प्रदान करे।

रायपुर उपभोक्ता फोरम के इस फैसले से बीमा क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश अन्य लंबित मामलों के लिए एक नजीर (Precedent) बनेगा। अक्सर कंपनियां ‘सर्वेयर रिपोर्ट’ या ‘देर से एफआईआर’ का बहाना बनाकर क्लेम रिजेक्ट कर देती हैं, लेकिन इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि वैध क्लेम को रोकना कानूनी रूप से गलत है। यदि कंपनी 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं करती है, तो उसे पूरी राशि पर 9% से 12% तक का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ सकता है।

पीड़ित पक्ष के वकील ने इस जीत को ‘सच्चाई की जीत’ बताया है। शासन और उपभोक्ता फोरम ने एक बार फिर साबित किया है कि आम आदमी के अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायपालिका प्रतिबद्ध है। यह खबर उन सभी वाहन स्वामियों के लिए एक चेतावनी भी है कि वे अपनी पॉलिसी के नियमों को ध्यान से पढ़ें और किसी भी अनहोनी की स्थिति में तुरंत कानूनी सहायता लें।

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