Iranian ship sinking in Indian Ocean: हिंद महासागर में ईरानी जहाज़ डूबने पर सियासत तेज, कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार से पूछे कई सवाल- NV News

Share this

N.V.News नई दिल्ली: Iranian ship sinking in Indian Ocean: भारतीय महासागर (Indian Ocean) में ईरानी नौसैनिक जहाज़ के डूबने की घटना को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के वरिष्ठ नेता और मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने इस मामले में केंद्र की Government of India और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से कई तीखे सवाल पूछे हैं।

पवन खेड़ा ने दावा किया कि ईरान का युद्धपोत भारत के निमंत्रण पर आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में शामिल होने आया था और वापसी के दौरान हिंद महासागर में उस पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि जब कोई देश भारत के निमंत्रण पर सैन्य अभ्यास में शामिल होता है, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी भारत की होती है। ऐसे में अगर हमारे समुद्री क्षेत्र के आसपास किसी मेहमान जहाज़ पर हमला हो जाता है, तो यह भारत की सुरक्षा व्यवस्था और कूटनीतिक क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Compromised हैं। नरेंद्र मोदी, Epstein File और अडानी केस के दबाव में हैं। अभी जो कुछ दिन पहले हुआ, वो किसी की भी समझ के परे है। आखिर नरेंद्र मोदी कुछ दिन पहले इजराइल क्यों गए?

नरेंद्र मोदी के इजराइल से वापस लौटने के 48 घंटे के अंदर गैर कानूनी जंग अमेरिका-इजराइल ने ईरान के साथ छेड़ दी और एक राष्ट्राध्यक्ष की हत्या हो गई।

नरेंद्र मोदी इस पूरे क्रम में कठपुतली बन गए। अमेरिका-इजराइल की अंदरखाने कुछ और तैयारी थी और नरेंद्र मोदी के दौरे से दिखाया कुछ और गया है।

खेड़ा ने 2018 की एक घटना का भी जिक्र किया, जब गोवा के आगे अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक यॉट को पकड़ा गया था, जिसमें दुबई की राजकुमारी Latifa bint Mohammed Al Maktoum मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि उस समय भारत ने समुद्री क्षेत्र में सक्रियता दिखाते हुए कार्रवाई की थी और खुद को हिंद महासागर का प्रभावी प्रहरी साबित किया था। लेकिन अब सवाल यह है कि जब एक मेहमान देश का जहाज़ खतरे में था, तब भारत की वही सतर्कता क्यों नहीं दिखी।

उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर ऐसे संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों में भाग लेने वाले जहाज़ भारी हथियारों के साथ नहीं आते, क्योंकि यह युद्ध नहीं बल्कि अभ्यास होता है। ऐसे में अगर कोई जहाज़ निहत्था या सीमित हथियारों के साथ था और उस पर हमला हुआ, तो यह घटना और भी गंभीर बन जाती है।

खेड़ा ने एक और दावा करते हुए कहा कि इस संयुक्त अभ्यास में अमेरिका को भी अपने जहाज़ भेजने थे, लेकिन आखिरी समय में उसने सिर्फ अधिकारियों को भेजा और युद्धपोत नहीं भेजे। उनके मुताबिक यह सवाल उठता है कि क्या भारत को पहले से जानकारी थी कि अमेरिकी पक्ष कोई सैन्य कार्रवाई करने वाला है। अगर जानकारी थी, तो भारत ने क्या कदम उठाए, और अगर जानकारी नहीं थी तो यह खुफिया और निगरानी तंत्र की बड़ी विफलता मानी जाएगी।

कांग्रेस नेता ने 1986 का उदाहरण भी दिया, जब अमेरिका का प्रसारण नेटवर्क Voice of America श्रीलंका में ट्रांसमीटर लगाना चाहता था। उस समय की कांग्रेस सरकार और तत्कालीन प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi ने इसे अनुमति नहीं दी थी। खेड़ा ने कहा कि उस दौर में भारत अपने रणनीतिक हितों को लेकर ज्यादा सतर्क था।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अक्सर खुद को हिंद महासागर का “गार्जियन” बताती है, लेकिन अगर उसी महासागर में भारत के आमंत्रण पर आए मेहमान जहाज़ की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकी, तो यह दावा सवालों के घेरे में आ जाता है।

इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जबकि विपक्ष लगातार जवाबदेही की मांग कर रहा है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

Share this

You may have missed