मनरेगा: ग्रामीण आजीविका का ‘सुरक्षा कवच’; पलायन पर लगाम और करोड़ों हाथों को मिला काम, बदल रही गांवों की सूरत….NV News

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रायपुर: ग्रामीण विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना’ (मनरेगा) ने ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता लाने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। यह योजना अब केवल गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ग्रामीण आजीविका की राह को बेहद मजबूत कर दिया है। प्रतिकूल मौसम और आर्थिक चुनौतियों के बीच, मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को न्यूनतम आय की गारंटी देकर उनके जीवन स्तर में सुधार किया है। विशेष रूप से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने ग्रामीण समाज में लैंगिक समानता और आर्थिक स्वावलंबन को नई दिशा दी है।

योजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों से गांवों में स्थायी संपत्तियों का निर्माण हो रहा है। जल संरक्षण, तालाबों का पुनरुद्धार, चेक डैम का निर्माण और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण जैसे कार्यों ने कृषि उत्पादकता को बढ़ाने में मदद की है। ‘कैच द रेन’ जैसे अभियानों को मनरेगा के साथ जोड़कर जल संकट से जूझ रहे इलाकों की तस्वीर बदली गई है। डिजिटल पारदर्शिता (जैसे NMMS ऐप और आधार आधारित भुगतान) ने यह सुनिश्चित किया है कि मेहनत की कमाई सीधे श्रमिक के बैंक खाते में बिना किसी बिचौलिये के पहुँचे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा ने ग्रामीण-शहरी पलायन (Migration) को नियंत्रित करने में एक ‘सेफ्टी वाल्व’ की तरह काम किया है। स्थानीय स्तर पर काम मिलने से श्रमिकों को मजबूरन शहरों की ओर नहीं जाना पड़ता, जिससे उनके परिवार की स्थिरता बनी रहती है। सरकार अब इस योजना के तहत ‘कौशल विकास’ (Project UNNATI) पर भी जोर दे रही है, ताकि अकुशल श्रमिक प्रशिक्षित होकर भविष्य में बेहतर आय प्राप्त कर सकें। यह योजना आज के दौर में ग्रामीण भारत के समावेशी विकास का सबसे सशक्त माध्यम सिद्ध हो रही है।

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