मेडिकल कॉलेज में लापरवाही का आरोप: इंजेक्शन के बाद 13 महीने की मासूम ने तोड़ा दम; परिजनों का भारी हंगामा…NV News
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सरगुजा संभाग के सबसे बड़े अस्पताल, राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (अंबिकापुर) में डॉक्टरों और स्टाफ की कथित लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। परिजनों का आरोप है कि एक गलत इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद 13 महीने की मासूम बच्ची की तबीयत बिगड़ी और उसने दम तोड़ दिया।
घटना का घटनाक्रम
परिजनों के अनुसार, बच्ची को सामान्य बुखार और सांस लेने में तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती इलाज के बाद उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही थी।
इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत: परिजनों का दावा है कि वार्ड में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने बच्ची को एक इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगाने के कुछ ही मिनटों के भीतर मासूम का शरीर नीला पड़ने लगा और उसे झटके आने लगे।
मौके पर मौत: डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन मासूम ने इलाज के दौरान ही दम तोड़ दिया।
परिजनों का आक्रोश और कार्रवाई की मांग
बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। परिजनों का कहना है कि जब तक दोषी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं होती और उन्हें निलंबित नहीं किया जाता, वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया है। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति (Inquiry Committee) गठित करने की बात कही है। अस्पताल प्रशासन का तर्क है कि मौत का कारण ‘रिएक्शन’ है या कुछ और, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
परिजनों का सवाल: “हमारी बच्ची खेल रही थी, फिर अचानक ऐसा कौन सा इंजेक्शन दिया गया कि उसकी जान चली गई? यह सीधा-सीधा मर्डर है।”
यह पहली बार नहीं है जब इस मेडिकल कॉलेज में लापरवाही के आरोप लगे हैं। पूर्व में भी नवजातों की मौत और इलाज में देरी को लेकर यह अस्पताल विवादों में रहा है।
