हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बीमा कंपनी की दलीलें खारिज, सड़क हादसे में मृतक के परिवार को ₹53.40 लाख का मुआवजा बरकरार…NV News

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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में मानवीय संवेदनाओं और कानून की सर्वोच्चता को सर्वोपरि रखते हुए बीमा कंपनी को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस की सिंगल बेंच ने बीमा कंपनी द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें निचली अदालत (Claims Tribunal) द्वारा तय किए गए मुआवजे की राशि को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को निर्धारित ₹53.40 लाख का मुआवजा हर हाल में दिया जाएगा।

यह पूरा मामला एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य की मौत हो गई थी। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने मामले की गंभीरता और मृतक की आय को देखते हुए ₹53.40 लाख की क्षतिपूर्ति राशि तय की थी। हालांकि, बीमा कंपनी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कंपनी का तर्क था कि दावा राशि बहुत अधिक है और दुर्घटना की परिस्थितियों में तकनीकी खामियां थीं, जिन्हें हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूरी तरह से खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति की असमय मृत्यु से परिवार को होने वाली आर्थिक और मानसिक क्षति की भरपाई पूरी तरह संभव नहीं है, लेकिन कानूनन जो राहत तय की गई है, उसमें कटौती का कोई ठोस आधार नहीं दिखता। कोर्ट ने बीमा कंपनी की याचिका को ‘आधारहीन’ बताते हुए निचली अदालत के फैसले को यथावत रखा। इस फैसले से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले काफी समय से न्याय और आर्थिक मदद के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में क्लेम सेटलमेंट (Claim Settlement) के मामलों के लिए एक नजीर साबित होगा। अक्सर बीमा कंपनियां मुआवजे की राशि कम करने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेती हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को परेशानी होती है। अब हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद प्रभावित परिवारों को समय पर और उचित न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। कोर्ट ने बीमा कंपनी को ब्याज सहित पूरी राशि भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।

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