ईरान-अमेरिका टकराव: ट्रंप की ‘रेड लाइन्स’ ने बढ़ाया युद्ध का खतरा, ईरान बोला- ‘झुकेंगे नहीं’…NV News
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वॉशिंगटन/तेहरान | अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) की नीति के लिए जाने जाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के लिए कुछ सख्त शर्तें और ‘रेड लाइन्स’ निर्धारित की हैं। इन शर्तों का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी सैन्य गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। हालांकि, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।
क्या हैं ट्रंप की ‘रेड लाइन्स’?
ट्रंप प्रशासन ने ईरान के सामने मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियां रखी हैं:
परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण रोक: ईरान को अपना यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) पूरी तरह बंद करना होगा।
मिसाइल प्रोग्राम का खात्मा: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को खत्म करने की शर्त।
क्षेत्रीय प्रभाव कम करना: लेबनान (हिजबुल्लाह), यमन (हुती) और सीरिया में सक्रिय अपने समर्थित गुटों को मदद बंद करना।
ईरान का रुख: “हम तैयार हैं”
ईरानी नेतृत्व और वहां के सैन्य कमांडरों ने दो टूक कहा है कि ट्रंप की धमकियां काम नहीं करेंगी। ईरान का कहना है कि:
वह अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए जारी रखेगा।
यदि अमेरिका ने कोई सैन्य दुस्साहस किया, तो ईरान के पास पलटवार करने के लिए ‘विनाशकारी’ विकल्प मौजूद हैं।
तेल की वैश्विक सप्लाई चेन (Hormuz Strait) को बाधित करना ईरान का एक बड़ा हथियार हो सकता है।
जंग की वजह क्यों बन सकते हैं ये हालात?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप ने दोबारा ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए या उसके तेल निर्यात को शून्य करने की कोशिश की, तो ईरान आर्थिक रूप से टूट सकता है। ऐसी स्थिति में ईरान ‘सर्वाइवल मोड’ में आकर इजरायल या अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सीधे हमले कर सकता है, जो एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध (Regional War) की शुरुआत होगी।
