छत्तीसगढ़ में 7 लाख अनियमित कर्मियों के भविष्य पर सस्पेंस; नियमितीकरण बना सियासी अखाड़ा, कर्मचारी आंदोलन की राह पर…NV News

Share this

रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ का सरकारी मशीनरी वर्तमान में एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ शासन का पहिया घुमाने वाले लगभग 7 लाख अनियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। ‘नियमितीकरण’ का वादा जो कभी चुनावी वैतरणी पार करने का जरिया था, अब सरकार के लिए गले की फांस और विपक्ष के लिए धारदार हथियार बन गया है। फरवरी 2026 की ताजा स्थिति के अनुसार, कर्मचारी संगठनों ने ‘मोदी की गारंटी’ के तहत किए गए 100 दिनों के भीतर कमेटी बनाने के वादे को लेकर फिर से मोर्चा खोल दिया है।

आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अकेले आउटसोर्सिंग के जरिए 1 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें ऊर्जा विभाग (27,000) और नगरीय प्रशासन (25,000) जैसे भारी-भरकम विभाग शामिल हैं। इन कर्मचारियों का दर्द यह है कि वे नियमित पदों के विरुद्ध 10-10 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो समान कार्य का समान वेतन मिल रहा है और न ही छंटनी के डर से मुक्ति। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के कुछ फैसलों ने योजना एवं सांख्यिकी विभाग के संविदा कर्मियों को नियमित करने का आदेश देकर उम्मीद जगाई है, लेकिन व्यापक स्तर पर कोई नीति अब भी नदारद है।

इस मुद्दे पर राजनीति तब और गरमा गई जब कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर ‘धोखाधड़ी’ का आरोप लगाया, वहीं भाजपा का पलटवार है कि पिछली कांग्रेस सरकार ने केवल समितियां बनाईं और धरातल पर कुछ नहीं किया। वर्तमान में कर्मचारी फेडरेशन का कहना है कि यदि सरकार उनके वेतन में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दे, तो उन्हें नियमित करना वित्तीय रूप से भी संभव होगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रिटायर कर्मचारियों को संविदा पर दोबारा रखने की सरकारी नीति ने कार्यरत युवाओं में भारी असंतोष पैदा कर दिया है।

महासमुंद से लेकर बस्तर तक, इन लाखों कर्मचारियों के परिवारों की नजरें अब आगामी बजट और सरकार के नीतिगत फैसलों पर टिकी हैं। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे एक बार फिर ‘कलम बंद, काम बंद’ जैसे बड़े आंदोलन के जरिए सरकारी कामकाज को ठप करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, रायपुर के तूता धरना स्थल पर सुगबुगाहट तेज है और यह मुद्दा आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

Share this

You may have missed