मिशन 31 मार्च: अमित शाह का तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा आज से, माओवाद के ‘समूल सफाए’ के लिए रायपुर में तैयार होगा फाइनल रोडमैप…NV News
Share this
भारत के केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह आज शाम अपने तीन दिवसीय महत्वपूर्ण प्रवास पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुँच रहे हैं। यह दौरा सुरक्षा की दृष्टि से ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद (LWE) को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इस डेडलाइन में अब मात्र 50 दिन के करीब का समय शेष है, ऐसे में शाह का यह दौरा ‘ऑपरेशन क्लीन’ की अंतिम समीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
दौरे का पूरा कार्यक्रम (Minute-to-Minute):
7 फरवरी (शनिवार): गृहमंत्री रात 8:00 बजे रायपुर पहुँचेंगे और होटल मेफेयर में वरिष्ठ प्रशासनिक व सुरक्षा अधिकारियों के साथ प्रारंभिक बैठक करेंगे।
8 फरवरी (रविवार): सुबह रायपुर में एक हाई-लेवल सिक्योरिटी रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे। इसमें छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना के आला अधिकारी शामिल होंगे। शाम को वे ‘छत्तीसगढ़ @ 25’ नेशनल कॉन्क्लेव में शामिल होंगे।
9 फरवरी (सोमवार): गृहमंत्री बस्तर के जगदलपुर जाएंगे, जहाँ वे ‘बस्तर पंडुम महोत्सव-2026’ के समापन समारोह में शामिल होकर जनजातीय संस्कृति और विकास का संदेश देंगे।
रणनीति का केंद्र: बस्तर और अबूझमाड़
बैठक का मुख्य एजेंडा बस्तर संभाग, विशेषकर अबूझमाड़ के उन इलाकों पर कब्जा करना है जो कभी नक्सलियों के ‘गढ़’ माने जाते थे। पिछले एक साल में सुरक्षाबलों ने 350 से अधिक नक्सलियों को ढेर किया है और सैकड़ों नए सुरक्षा कैंप (FOBs) स्थापित किए हैं। गृहमंत्री इस दौरान सुरक्षाबलों को ‘अंतिम प्रहार’ के लिए नए निर्देश दे सकते हैं, ताकि तय समय सीमा के भीतर लाल आतंक का अंत सुनिश्चित हो सके।
विकास और विश्वास पर जोर:
अमित शाह केवल सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ‘विकास के जरिए विश्वास’ की रणनीति पर भी चर्चा करेंगे। अंदरूनी इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी, मोबाइल टावर और बैंक सुविधाओं के विस्तार की समीक्षा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, गृहमंत्री बस्तर के किसी अंदरूनी इलाके का दौरा भी कर सकते हैं ताकि ग्राउंड जीरो पर तैनात जवानों का उत्साहवर्धन किया जा सके।
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
अंतिम समीक्षा: 31 मार्च की डेडलाइन से पहले नक्सलियों के खिलाफ अंतिम बड़ी रणनीतिक बैठक।
संयुक्त रणनीति: छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी राज्यों के समन्वय पर विशेष चर्चा।
बस्तर पंडुम: आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास।
सुरक्षा घेरा: रायपुर और बस्तर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम, चप्पे-चप्पे पर कमांडो तैनात।
