अदालत का कड़ा रुख: झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने पर DSP और पूर्व CMO की पत्नी पर लगा 2 लाख का जुर्माना…NV News

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झूठे मुकदमों और सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए स्थानीय अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक निर्दोष व्यक्ति को साजिश के तहत झूठे केस में फंसाकर जेल भेजने के मामले में DSP (पुलिस उपाधीक्षक) और एक पूर्व CMO (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) की पत्नी पर संयुक्त रूप से 2 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून का इस्तेमाल किसी के खिलाफ प्रतिशोध लेने के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि आरोपियों ने अपनी पहुंच और प्रभाव का गलत इस्तेमाल करते हुए पीड़ित के खिलाफ फर्जी सबूत और झूठी गवाही तैयार की थी। इस साजिश के कारण पीड़ित को न केवल मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, बल्कि उसे सामाजिक अपमान का सामना करते हुए जेल भी जाना पड़ा। जज ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो न्याय व्यवस्था पर से आम आदमी का भरोसा उठने लगता है।

अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से यह साफ हो गया कि DSP ने जांच प्रक्रिया में घोर लापरवाही बरती और पूर्व CMO की पत्नी के निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया। बचाव पक्ष की दलीलें कोर्ट में टिक नहीं सकीं, क्योंकि पुलिस द्वारा पेश की गई केस डायरी में कई विसंगतियां और तथ्यहीन बातें पाई गईं।

जुर्माने की यह राशि पीड़ित को मुआवजे के तौर पर दी जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि यह राशि निर्धारित समय सीमा के भीतर जमा की जाए, अन्यथा संबंधित पक्षों के खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, अदालत ने उच्च अधिकारियों को दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच करने और सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं।

इस फैसले की कानूनी हलकों में काफी चर्चा हो रही है। जानकारों का मानना है कि यह निर्णय उन अधिकारियों के लिए एक नजीर साबित होगा जो पद का दुरुपयोग कर निर्दोष नागरिकों को परेशान करते हैं। पीड़ित ने कोर्ट के फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उसे न्याय मिलने में समय जरूर लगा, लेकिन सत्य की जीत हुई है।

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