भूपेश बघेल को बड़ा झटका: ‘सेक्स CD’ कांड में बरी करने वाला आदेश रद्द, अब चलेगा नियमित मुकदमा…NV News

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छत्तीसगढ़ की राजनीति में साल 2017 में भूचाल लाने वाले ‘सेक्स सीडी’ मामले में एक नया और निर्णायक मोड़ आया है। रायपुर स्थित विशेष सीबीआई (CBI) अदालत ने शनिवार (24 जनवरी 2026) को फैसला सुनाते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस मामले से दोषमुक्त (Discharge) कर दिया गया था। सत्र न्यायालय ने सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका (Review Petition) को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला साल 2017 का है, जब तत्कालीन भाजपा सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री रहे राजेश मूणत की एक कथित अश्लील सीडी सार्वजनिक हुई थी। भाजपा ने इसे कूटरचित (Fake) और राजनीतिक साजिश करार दिया था। आरोप था कि तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और पत्रकार विनोद वर्मा ने मंत्री की छवि धूमिल करने के लिए इस सीडी को सोशल मीडिया पर प्रसारित किया और इसकी प्रतियां बांटीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

मुकदमे का करना होगा सामना

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मार्च 2025 (या 2024 के अंत में) साक्ष्यों के अभाव में भूपेश बघेल को इस केस से बरी कर दिया था। हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी। अब विशेष अदालत ने माना है कि मामले में मुकदमे के पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इस आदेश का सीधा अर्थ यह है कि भूपेश बघेल को अब नियमित रूप से कोर्ट में पेश होना होगा और उन पर आईपीसी की धाराओं 469, 471 और आईटी एक्ट की धारा 67(2) के तहत मुकदमा चलेगा।

अन्य आरोपियों की अपील भी खारिज

मुख्य आरोपी भूपेश बघेल के साथ-साथ इस मामले के अन्य आरोपियों—विनोद वर्मा (पूर्व सीएम के सलाहकार), कैलाश मुरारका और विजय भाटिया को भी अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने उन अपीलों को भी खारिज कर दिया है जिनमें उन्होंने अपने खिलाफ आरोप तय (Framing of Charges) किए जाने को चुनौती दी थी। अब इन सभी को एक साथ कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।

राजनीतिक हलचल तेज

इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में एक बार फिर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। भाजपा ने इसे ‘सच्चाई की जीत’ बताया है, वहीं कांग्रेस और भूपेश बघेल के समर्थकों का कहना है कि यह उन्हें राजनीतिक रूप से परेशान करने की साजिश है। बघेल के वकीलों का कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाएंगे। फिलहाल, इस आदेश ने प्रदेश की सियासत में ‘सीडी कांड’ की फाइलों को फिर से खोल दिया है।

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