Janjgir-Champa news: जमीन विवाद में ‘हुक्का-पानी बंद’: एक परिवार का सामाजिक बहिष्कार, कानून से ऊपर पंचायत का फरमान?

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जांजगीर-चांपा। Janjgir-Champa news, छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ जमीन विवाद के नाम पर एक पूरे परिवार को सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया गया। पामगढ़ तहसील के ग्राम भलवाही में न तो कानून की प्रतीक्षा की गई और न ही अदालत के फैसले का इंतजार—सीधे गांव में मुनादी कर हुक्का-पानी बंद करवा दिया गया।

गांव में मुनादी, पूरे परिवार पर सामाजिक पाबंदी

family boycott news, आरोप है कि गांव में बैठक बुलाने के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लेते हुए पीड़ित परिवार के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का फरमान जारी किया। मुनादी कर यह ऐलान किया गया कि पीड़ित परिवार से कोई संबंध नहीं रखेगा और उन्हें गांव की राशन व्यवस्था से भी वंचित किया जाएगा।

निशाने पर हैं शिवप्रसाद खुंटे, मदन खुटे और उनका पूरा परिवार, जिन्हें गांव से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है।

अदालत में मामला, गांव में फैसला!

family boycott news, पीड़ित परिवार के अनुसार पूरा विवाद शासकीय जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण से जुड़ा है, जो इस समय न्यायालय में विचाराधीन है। सवाल यह उठता है कि जब मामला कोर्ट में है, तो गांव में किस अधिकार से फैसला सुना दिया गया?

‘तालीबानी फरमान’ का आरोप, फर्जी कोटवार पर भी सवाल

family boycott news, पीड़ितों का आरोप है कि राकेश खुटे, लखन खुटे, कलश खुटे, खोलूराम लहरे और बलिराम बंजारे ने मिलकर यह सामाजिक फरमान जारी करवाया।

इतना ही नहीं, कथित तौर पर फर्जी कोटवार नंदकुमार खुटे ने 4 जनवरी 2026 को मुनादी कर यह ऐलान किया कि पीड़ित परिवार का गांव में कोई अधिकार नहीं रहेगा।

छह महीने से मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का दावा

family boycott news, पीड़ित परिवार का कहना है कि वे बीते छह महीनों से लगातार मानसिक, सामाजिक और प्रशासनिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, पूरे परिवार को एक साथ सजा दी गई है।

थाने में शिकायत, पुलिस जांच में जुटी

family boycott news, पीड़ित परिवार ने थाना मुलमुला में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और सरपंच सहित ग्रामीणों को थाने बुलाकर समझाइश दी जा रही है। हालांकि पुलिस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

सरपंचपति का पक्ष: ‘पहले भी हो चुका है बहिष्कार’

family boycott news, सरपंचपति फागुराम का कहना है कि गांव में पहले भी ऐसे फैसले लिए जाते रहे हैं। उनका दावा है कि पीड़ित परिवार खुद दबंग रहा है और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर रखा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तहसील स्तर पर मिलीभगत कर ग्रामीणों को धमकाया जा रहा है और स्कूल की जमीन तक पर बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई है।

जनपद सदस्य बोले—‘हमें जानबूझकर निशाना बनाया गया’

family boycott news, दूसरी ओर, जनपद सदस्य रामगिलास खुंटे ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कुछ दबंगों ने ग्रामीणों को भड़काकर उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कराया। उनका कहना है कि उनका परिवार करीब 40 वर्षों से उसी जमीन पर रह रहा है।

सरकारी जमीन पर कब्जे से नाराज ग्रामीण

family boycott news, गांव में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को लेकर व्यापक नाराजगी है। एक मामले में तो खेल मैदान को ही ट्रैक्टर से जोत दिया गया, जिससे युवाओं में आक्रोश फैल गया।

हालांकि जिस व्यक्ति ने मैदान जोता, वह माफी मांगकर बच गया, जबकि पूरा बहिष्कार एक ही परिवार पर थोप दिया गया।

बड़ा सवाल: क्या पंचायत कानून से ऊपर है?

family boycott news, यह मामला अब सिर्फ एक परिवार का नहीं रहा। यह प्रशासन, पुलिस और शासन व्यवस्था के सामने सीधा सवाल खड़ा करता है—

क्या सामाजिक बहिष्कार अपराध नहीं है?

क्या पंचायतनुमा फैसले कानून से ऊपर हो सकते हैं?

और अगर नहीं, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?

फिलहाल गांव में तनाव का माहौल है और निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। समय रहते समाधान नहीं निकला, तो किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।

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