Collector order cancelled: प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: कलेक्टर का निलंबन आदेश निरस्त, कर्मचारी बहाल

Share this

सरगुजा। सरगुजा संभागायुक्त ने एक अहम निर्णय लेते हुए मनेन्द्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर (MCB) जिले के कलेक्टर द्वारा जारी निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया है। संभागायुक्त ने स्पष्ट किया कि संबंधित कर्मचारी को निलंबन से पहले न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन MCB के जिला संयोजक गोपाल सिंह को कलेक्टर द्वारा 30 दिसंबर 2025 को निलंबित किया गया था। इस आदेश के खिलाफ गोपाल सिंह ने संभागायुक्त न्यायालय में अपील दायर की थी।

अपीलार्थी गोपाल सिंह वर्तमान में व्यायाम शिक्षक, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलबहरा, विकासखंड मनेन्द्रगढ़, जिला MCB में पदस्थ हैं। वे तीन दिवसीय कर्मचारी आंदोलन के दौरान 30 दिसंबर को कलेक्टर कार्यालय मनेन्द्रगढ़ पहुंचे थे, जहां उन्होंने बिना किसी दबाव, अभद्रता या अनुशासनहीनता के कर्मचारियों से हड़ताल के समर्थन का अनुरोध किया था। उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

 

कमिश्नर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

कमिश्नर कोर्ट ने प्रकरण में कलेक्टर कार्यालय को नोटिस जारी कर मूल अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर द्वारा 2 जनवरी 2026 को जवाब सहित दस्तावेज पेश किए गए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माना कि निलंबन आदेश पारित करने से पूर्व गोपाल सिंह को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।

संभागायुक्त ने अपने आदेश में कहा कि प्राकृतिक न्याय की मूल भावना यही है कि किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई से पहले उसे कारण बताओ नोटिस और समुचित सुनवाई का अवसर दिया जाए। बिना इस प्रक्रिया के पारित आदेश न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

 

निलंबन आदेश निरस्त, बहाली के निर्देश

इन तथ्यों के आधार पर संभागायुक्त ने कलेक्टर, MCB द्वारा पारित निलंबन आदेश को निरस्त करते हुए गोपाल सिंह को तत्काल प्रभाव से बहाल करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्हें उनके पूर्व पदस्थापना स्थल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलबहरा में पदस्थ करने का आदेश दिया गया है। निलंबन अवधि को कार्य अवधि मानते हुए प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया गया है।

यह निर्णय प्रशासनिक कार्यवाहियों में प्राकृतिक न्याय के पालन की अनिवार्यता को एक बार फिर मजबूती से रेखांकित करता है।

Share this

You may have missed