CGPSC Scam 2021: CBI ने 400 पन्नों की फाइनल चार्जशीट दाखिल की, पूर्व अध्यक्ष समेत 13 आरोपी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2021 की भर्ती परीक्षा में सामने आए बहुचर्चित घोटाले को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष अदालत में लगभग 400 पन्नों की फाइनल चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सोनवानी, परीक्षा नियंत्रक, सचिव और उद्योगपतियों समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही अब इस बहुचर्चित भर्ती घोटाले में न्यायिक प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

सुनियोजित साजिश का खुलासा

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि CGPSC 2021 भर्ती घोटाला पूरी तरह से सुनियोजित और संगठित साजिश का परिणाम था। प्रश्नपत्र लीक कराने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर सहित अन्य राजपत्रित पदों पर नियुक्त कराने के लिए बारनवापारा को विशेष परीक्षा केंद्र बनाया गया था।

जांच के अनुसार, इस विशेष परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों के ठहरने, आवागमन और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कारोबारी उत्कर्ष चंद्राकर को सौंपी गई थी। चार्जशीट के अंतिम हिस्से में उत्कर्ष चंद्राकर को भी औपचारिक रूप से आरोपी बनाया गया है।

 

एक साल तक दबाकर रखा गया प्रश्नपत्र

चार्जशीट में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि CGPSC 2020 के लिए तैयार किया गया प्रश्नपत्र परीक्षा नियंत्रक द्वारा करीब एक वर्ष तक दबाकर रखा गया था। इस प्रश्नपत्र की कोई आधिकारिक एंट्री नहीं की गई और बाद में इसी लीक हुए प्रश्नपत्र का उपयोग CGPSC 2021 की मुख्य परीक्षा में कर लिया गया।

सीबीआई के मुताबिक, इस प्रश्नपत्र की जानकारी पहले ही तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी के रिश्तेदारों तक पहुंच चुकी थी।

 

व्हाट्सएप चैट से खुला राज

प्रश्नपत्र लीक का खुलासा टामन सोनवानी के भतीजे विनीत खेबर और उसकी पत्नी स्वेता के बीच हुई व्हाट्सएप चैट से हुआ। यह चैट सीबीआई जांच का अहम आधार बनी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा से पहले ही कुछ लोगों के पास प्रश्नपत्र और मॉडल उत्तर मौजूद थे।

 

रिश्तेदारों को पहुंचाया गया सीधा फायदा

सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने अपने बेटे सुमित ध्रुव को पहले ही प्रश्नपत्र और मॉडल उत्तर उपलब्ध करा दिए थे। परिणामस्वरूप सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हो गया। तलाशी के दौरान उनके घर से प्रश्नपत्र और उत्तरों की फोटोकॉपी भी बरामद की गई।

इसी तरह तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी पर अपनी बहू मीशा कोसले और दीपा आदिल को चयन में अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है। इसके अलावा नेहा और निखिल खलखो के चयन को भी चार्जशीट में संदिग्ध बताया गया है।

हालांकि, परीक्षा में शामिल 29 अभ्यर्थियों को आरोपी नहीं बल्कि गवाह के रूप में पेश किया गया है।

 

171 पदों पर हुई थी भर्ती

गौरतलब है कि CGPSC 2021 परीक्षा के माध्यम से कुल 171 पदों पर भर्ती की गई थी। प्रारंभिक परीक्षा में 2565 अभ्यर्थी सफल हुए थे, जबकि मुख्य परीक्षा में 509 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की थी। इंटरव्यू के बाद 170 अभ्यर्थियों की अंतिम चयन सूची जारी की गई थी।

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