Agriculture Crime: धान खरीदी सीजन में अवैध कारोबार बेलगाम, पुलिस कार्रवाई के बावजूद राजस्व और खाद्य विभाग पर गंभीर सवाल

Share this

कोटा (बिलासपुर)। धान खरीदी सीजन के बीच कोटा क्षेत्र से लाकर मंडियों में अवैध धान खपाने का खेल पूरी बेखौफी के साथ जारी है। पुलिस लगातार दबिश देकर धान से लदे वाहनों को पकड़ रही है, लेकिन राजस्व विभाग और खाद्य विभाग की निष्क्रियता ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धान माफिया बिना किसी डर के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम कारोबार चला रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, कोटा क्षेत्र से धान लाकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में अवैध भंडारण और बिक्री का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। रात के अंधेरे में ट्रक, पिकअप और ट्रैक्टरों के जरिए धान को मंडियों और गोदामों तक पहुंचाया जा रहा है। पुलिस को सूचना मिलते ही कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन अधिकतर मामलों में कार्रवाई केवल परिवहन तक ही सीमित रह जाती है।

सबसे गंभीर सवाल उन विभागों की भूमिका को लेकर उठ रहे हैं, जिनकी जिम्मेदारी धान की खरीदी, भंडारण और परिवहन पर निगरानी रखने की है। राजस्व विभाग और खाद्य विभाग की उड़न दस्तक टीमें लगातार निष्क्रिय नजर आ रही हैं। तहसीलदार और फूड इंस्पेक्टर की जिम्मेदारी होने के बावजूद कई अवैध गोदाम वर्षों से संचालित हो रहे हैं। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों को सब कुछ पता होने के बावजूद सिर्फ कागजी कार्रवाई कर खानापूर्ति की जा रही है।

किसानों का कहना है कि अवैध धान कारोबार के कारण उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। समर्थन मूल्य पर खरीदी प्रभावित हो रही है, फर्जी किसानों के नाम पर कोटा क्षेत्र से बाहरी धान लाकर मंडियों में खपाया जा रहा है। बिचौलियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। तहसीलदार और फूड इंस्पेक्टर पर कई मामलों में जानबूझकर छूट देने के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे धान माफिया और अधिक बेखौफ हो गए हैं।

इधर पुलिस ने एक बार फिर कार्रवाई करते हुए विभागीय लापरवाही को उजागर किया है। बिलासपुर पुलिस अधीक्षक को सूचना मिली थी कि कोटा क्षेत्र से अवैध धान चपोरा क्षेत्र की ओर भेजा जा रहा है। एसपी के निर्देश पर रतनपुर थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एक माज़दा वाहन को पकड़ा और अवैध धान परिवहन के मामले में विधिसम्मत कार्रवाई की।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन राजस्व और खाद्य विभाग के सहयोग के बिना पूरे नेटवर्क को तोड़ना संभव नहीं है। अवैध भंडारण स्थलों और मंडियों की सघन जांच के बिना धान माफिया पर पूरी तरह लगाम नहीं लगाई जा सकती। वहीं तहसीलदार और फूड इंस्पेक्टर की निष्क्रियता और संभावित मिलीभगत के संकेत अब साफ नजर आने लगे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला हर साल की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? कोटा क्षेत्र में धान माफिया जिस तरह से खुलेआम और बेखौफ सक्रिय हैं, उससे प्रशासनिक निगरानी की कमजोरी और विभागीय मिलीभगत की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

Share this