EOW News: चैतन्य बघेल की बढ़ीं मुश्किलें, EOW ने पेश किया 3800 पन्नों का 8वां पूरक चालान

Share this

रायपुर। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की कानूनी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। करीब छह महीने से जेल में बंद चैतन्य बघेल के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कोर्ट में 3800 पन्नों का आठवां पूरक चालान पेश किया है। इस पूरक चालान में बड़ा खुलासा करते हुए दावा किया गया है कि चैतन्य बघेल को 200 से 250 करोड़ रुपये की अवैध रकम मिली है।

EOW के अनुसार, यह खुलासा सौम्या, अरुणपति, अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट की जांच के बाद सामने आया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन चैट्स से शराब घोटाले से जुड़े कई अहम राज उजागर हुए हैं। इन नए तथ्यों के सामने आने के बाद माना जा रहा है कि चैतन्य बघेल को अभी लंबा समय जेल में बिताना पड़ सकता है।

 

व्हाट्सऐप चैट से खुले कई राज

जांच एजेंसियों के मुताबिक, चैतन्य बघेल पर आरोप है कि उन्होंने शराब माफियाओं की मदद से करीब 1000 करोड़ रुपये की ब्लैक मनी को व्हाइट में कन्वर्ट करने में अहम भूमिका निभाई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का दावा है कि इस अवैध ब्लैक एंड व्हाइट कारोबार में चैतन्य बघेल को सीधे तौर पर करीब 16 करोड़ रुपये का फायदा हुआ, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपना बिजनेस सेटअप खड़ा करने में किया।

 

18 जुलाई से न्यायिक हिरासत में

बताया जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को उनके भिलाई स्थित निवास से मनी लॉन्ड्रिंग और शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। ED के अनुसार, चैतन्य बघेल ने करीब 16 करोड़ 70 लाख रुपये की अवैध कमाई को अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया। आरोप है कि यह पैसा नगद भुगतान, फर्जी बैंक एंट्री और फ्लैट खरीद के जरिए खपाया गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लो के साथ मिलकर विट्ठलपुरम नामक परियोजना में फर्जी फ्लैट खरीद की योजना बनाई और करीब 5 करोड़ रुपये हासिल किए। ये फ्लैट ढिल्लो के कर्मचारियों के नाम पर खरीदे गए थे, जबकि असली लाभार्थी चैतन्य बघेल ही थे।

 

3200 करोड़ से ज्यादा का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच फिलहाल ED द्वारा की जा रही है। ED ने इस मामले में ACB में FIR दर्ज कराई है, जिसमें 3200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का जिक्र किया गया है। FIR में राजनेताओं, आबकारी विभाग के अधिकारियों और कारोबारियों को नामजद किया गया है।

जांच एजेंसी का दावा है कि तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया। आरोप है कि घोटाले से अर्जित अवैध रकम को विभिन्न माध्यमों से आगे निवेश किया गया।

Share this

You may have missed