RTE Admission Rule Changed: छत्तीसगढ़ में अब प्राइवेट स्कूलों में RTE के तहत कक्षा 1 से ही मिलेगा प्रवेश, निजी स्कूल संघ का विरोध

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा बदलाव किया है। विभाग द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार अब निजी स्कूलों में RTE के अंतर्गत बच्चों को केवल कक्षा पहली (Class 1) से ही प्रवेश दिया जाएगा। नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी में आरटीई के तहत प्रवेश की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।

स्कूल शिक्षा विभाग के इस फैसले का छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग अपने ही 2015 के नियमों से पीछे हट रहा है, जो कि गलत और असंवैधानिक है।

राजीव गुप्ता का कहना है कि निजी स्कूलों में पढ़ाई की शुरुआत नर्सरी से होती है, जहां बच्चों की भाषा, व्यवहार और सीखने की बुनियाद रखी जाती है। ऐसे में RTE के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को सीधे कक्षा एक में प्रवेश देने से शैक्षणिक स्तर में गंभीर असमानता देखने को मिलेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार निजी स्कूलों को नर्सरी और पीपीटू (Pre-Primary) की फीस की प्रतिपूर्ति से बचने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है। इससे अमीर और गरीब बच्चों के बीच शिक्षा की खाई और गहरी होगी।

एसोसिएशन का कहना है कि 3 से 6 वर्ष की आयु बाल्यावस्था की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जहां बच्चों में भाषा, समझ और सामाजिक व्यवहार विकसित होता है। आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के बच्चे जहां नर्सरी से पढ़ाई जारी रखेंगे, वहीं गरीब बच्चे सीधे कक्षा एक में प्रवेश लेकर दबाव और पिछड़ेपन का शिकार होंगे।

राजीव गुप्ता ने यह भी कहा कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21-A (शिक्षा का अधिकार) की भावना के विपरीत है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी Foundational Education (3-8 वर्ष) को बेहद आवश्यक मानती है।

निजी स्कूल संघ का दावा है कि इस फैसले से बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ेगा और ड्रॉप-आउट की संभावना भी बढ़ सकती है, जो RTE के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।

 

क्या है शिक्षा विभाग का आदेश?

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा डीपीआई संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय को जारी आदेश में कहा गया है कि

निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के तहत राज्य में निजी स्कूलों द्वारा अब केवल कक्षा पहली में ही प्रवेश दिए जाने हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

यह आदेश स्कूल शिक्षा विभाग की उप सचिव नीलम टोप्पो द्वारा जारी किया गया है।

 

 

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