Old Pension Scheme मोदी सरकार का बड़ा फैसला, लोकसभा में साफ किया रुख
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नई दिल्ली: सरकारी कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चल रही बहस पर केंद्र की मोदी सरकार ने अब पूरी तरह स्थिति स्पष्ट कर दी है। ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को लेकर कर्मचारियों और राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चाएं हो रही थीं, लेकिन लोकसभा में दिए गए जवाब से सरकार का रुख साफ हो गया है।
केंद्र सरकार के वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को दोबारा लागू करने की सरकार की कोई योजना नहीं है। सरकार के इस जवाब के बाद OPS की वापसी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
मंत्री पंकज चौधरी ने यह भी जानकारी दी कि कुछ राज्य सरकारों ने अपने कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम को फिर से लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने OPS को दोबारा शुरू करने के अपने फैसले की सूचना पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) को दी है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने यह भी साफ किया कि NPS के तहत कर्मचारियों और सरकार द्वारा जमा किया गया कॉर्पस राज्यों को लौटाने का मौजूदा कानून में कोई प्रावधान नहीं है। पंकज चौधरी ने कहा कि PFRDA अधिनियम, 2013 और उससे जुड़े नियमों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके तहत यह राशि राज्य सरकारों को वापस की जा सके।
लोकसभा में सरकार ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी। UPS एक फंड आधारित पेंशन प्रणाली है, जिसमें कर्मचारी और सरकार दोनों का नियमित योगदान निवेश के जरिए बढ़ता है। रिटायरमेंट के समय इसके तहत कर्मचारियों को कुछ सुनिश्चित लाभ दिए जाते हैं।
UPS के तहत मिलने वाले प्रमुख लाभ
25 वर्ष की सेवा पर आखिरी 12 महीनों के औसत बेसिक वेतन का 50% पेंशन
कर्मचारी के निधन पर जीवनसाथी को 60% फैमिली पेंशन
कम से कम 10 वर्ष की सेवा पर ₹10,000 न्यूनतम मासिक पेंशन
CPI-IW के आधार पर महंगाई राहत (DA)
ग्रेच्युटी के अलावा लंपसम भुगतान का प्रावधान
सरकार ने एक बार फिर दोहराया कि केंद्र फिलहाल ओल्ड पेंशन स्कीम की वापसी के पक्ष में नहीं है, और भविष्य में भी इसकी कोई योजना नहीं है।
