सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: इस्तीफा देने वाले कर्मचारी को पेंशन का अधिकार नहीं, VRS से बताया अलग

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दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन को लेकर एक अहम और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि नौकरी से इस्तीफा देने वाला कर्मचारी पेंशन का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि इस्तीफा और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) दोनों अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं। कोर्ट ने सेंट्रल सिविल सर्विस पेंशन नियम (CCS Pension Rules) का हवाला देते हुए मृत कर्मचारी के परिजनों की पेंशन संबंधी याचिका खारिज कर दी।

 

सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि इस्तीफा स्वीकार होते ही कर्मचारी की पूर्व सेवा समाप्त मानी जाती है, जिससे वह पेंशन का हकदार नहीं रह जाता। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस्तीफे को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति नहीं माना जा सकता।

 

यह मामला दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (DTC) के एक कर्मचारी से जुड़ा है, जिसने लगभग 30 वर्षों तक सेवा देने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। कर्मचारी के निधन के बाद उसके कानूनी वारिसों ने पेंशन की मांग को लेकर याचिका दायर की थी।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि कर्मचारी के त्यागपत्र को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) माना जाना चाहिए, जिससे परिवार को पेंशन का लाभ मिल सके। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि इस्तीफा देने के बाद की गई सेवा की गणना पेंशन के लिए नहीं की जा सकती।

 

क्या है पूरा मामला

साल 1985 में याचिकाकर्ता के परिजन को दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में कंडक्टर के पद पर नियुक्त किया गया था। करीब 30 साल की सेवा के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया, जिसे कॉरपोरेशन ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद कर्मचारी ने इस्तीफा वापस लेने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए।

कॉरपोरेशन ने पेंशन, ग्रेच्युटी और छुट्टी के बदले भुगतान (Leave Encashment) जैसे सेवानिवृत्ति लाभ देने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ कर्मचारी ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में याचिका दायर की, जहां कॉरपोरेशन के फैसले को सही ठहराया गया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि कर्मचारी के कानूनी वारिस ग्रेच्युटी और छुट्टी के बदले भुगतान के हकदार हैं, लेकिन पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा।

 

नियम 48-A पर भी कोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने यह भी खारिज कर दिया कि कर्मचारी CCS Pension Rules के नियम 48-A के तहत पेंशन का पात्र है। डिवीजन बेंच ने कहा कि नियम 48-A के तहत पेंशन पाने के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए कम से कम तीन महीने पहले नोटिस देना अनिवार्य होता है। चूंकि कर्मचारी ने इस्तीफा दिया था, इसलिए वह इस नियम के अंतर्गत पेंशन का दावा नहीं कर सकता।

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