रतनपुर में उपसरपंच की हत्या का खुलासा: प्रेम प्रसंग विवाद में दो सगे भाई गिरफ्तार, जंगल में छुपाया था शव
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रतनपुर/बिलासपुर। रतनपुर थाना क्षेत्र के भैंसाझार जंगल में चार दिन पहले मिली उपसरपंच सूर्यप्रकाश बघेल की लाश की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि प्रेम प्रसंग को लेकर हुए विवाद में गांव के दो सगे भाइयों ने मिलकर उनकी हत्या कर दी थी और सबूत मिटाने के लिए शव को जंगल में छिपा दिया था। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं मामले में और लोगों की संलिप्तता की आशंका को देखते हुए जांच जारी है।
कैसे हुआ था गायब?
भैंसाझार निवासी सूर्यप्रकाश बघेल ठेकेदारी का काम करते थे और पूर्व में उपसरपंच भी रह चुके थे।
3 दिसंबर की सुबह 10 बजे वे जेंजराडीह मुक्तिधाम में निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान वे सीमेंट लाने की बात कहकर गांव की ओर निकले लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने अगले दिन रतनपुर थाने में गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कराई।
मोबाइल की लास्ट लोकेशन के आधार पर पुलिस ने खोजबीन शुरू की।
जंगल में मिली बाइक और फिर शव
शुक्रवार को ग्रामीणों को भैंसाझार जंगल में झाड़ियों के बीच उनकी बाइक मिली। थोड़ी दूर पर ही सूर्यप्रकाश का शव भी बरामद हुआ।
सूचना मिलते ही एएसपी अर्चना झा, डीएसपी लालचंद मोहले, फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचे।
पोस्टमार्टम में सिर एवं शरीर पर चोट के निशान मिले, जिससे स्पष्ट हुआ कि मौत मारपीट से हुई है। इसके बाद हत्या का मामला दर्ज किया गया।
हत्या का कारण बना प्रेम प्रसंग
शुरुआती जांच में लेन-देन विवाद की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में पुलिस को पता चला कि गांव के दो युवकों के साथ प्रेम प्रसंग को लेकर उपसरपंच का विवाद हुआ था।
घटना के बाद दोनों युवक गांव से फरार हो गए थे।
सूचना के आधार पर पुलिस ने कोटा क्षेत्र के भुंडा गांव से
रंजीत खाण्डे (23) और सुधीर खाण्डे (21) को पकड़ा।
कॉल डिटेल्स और मोबाइल लोकेशन सामने आने पर दोनों ने कड़ी पूछताछ में हत्या की बात कबूल कर ली।
पुलिस टीम और अधिकारी
एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देशन में एएसपी अर्चना झा और डीएसपी लालचंद मोहले के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी।
टीम में शामिल रहे –
एसआई कमलेश कुमार बंजारे, मेलाराम कठौतिया, साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक अजहरउद्दीन, एसआई हेमंत आदित्य, प्रधान आरक्षक राहुल सिंह, आतिश पारिख, बलदेव सिंह, कौशल खुंटे, आरक्षक आकाश डोंगरे, धीरज कश्यप, महादेव कुजूर, तदबीर पोर्ते, दीपक मरावी और प्रशांत सिंह।
