संसद में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा: मोदी–सौगत रॉय के बीच ‘बंकिम दा बाबू’ पर हल्की नोकझोंक, PM ने 121 बार लिया ‘वंदे मातरम्’ का नाम

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नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में सोमवार को वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर ऐतिहासिक चर्चा हुई। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और टीएमसी सांसद सौगत रॉय के बीच एक दिलचस्प क्षण देखने को मिला। पीएम मोदी अपने भाषण में वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी को “बंकिम दा” कह रहे थे, जिस पर सौगत रॉय ने उन्हें बीच में टोका और कहा— “उन्हें बंकिम बाबू कहिए।”

सौगत रॉय के इस हस्तक्षेप पर पीएम मोदी मुस्कुराए और कहा— “थैंक्यू… आपको तो दादा कह सकता हूं न? कहीं आपको इसमें ऐतराज न हो जाए।”

संसद में यह हल्का-फुल्का पल काफी चर्चित रहा

 

कांग्रेस ने घोंटा संविधान का गला: PM मोदी

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष पूरे हो रहे थे, तब देश आपातकाल के दौर से गुजर रहा था। उन्होंने कहा—

“आपातकाल में संविधान का गला घोंट दिया गया था। वंदे मातरम् ने ही 1947 में देश को आज़ादी दिलाने में भावनात्मक नेतृत्व किया।”

 

पीएम मोदी ने आगे कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि आत्मा था, जिसके कारण हजारों स्वतंत्रता सेनानी आंदोलन में जुटे थे।

PM के भाषण में ‘वंदे मातरम्’ 121 बार

लोकसभा में दिए गए अपने एक घंटे लंबे भाषण में पीएम मोदी ने कई बार प्रमुख शब्दों का उल्लेख किया। आँकड़ों के अनुसार:

 

वंदे मातरम् — 121 बार

देश — 50 बार

भारत — 35 बार

अंग्रेज — 34 बार

बंगाल — 17 बार

कांग्रेस — 13 बार

बकिम चंद्र चटर्जी — 10 बार

नेहरू — 7 बार

महात्मा गांधी — 6 बार

मुस्लिम लीग — 5 बार

जिन्ना — 3 बार

संविधान — 3 बार

मुसलमान — 2 बार

 

उन्होंने बताया कि 1936 में मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से वंदे मातरम् के खिलाफ अभियान चलाया, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने इसका तीखा विरोध नहीं किया। पीएम ने कहा—

“नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा, इसलिए उन्होंने मुस्लिम लीग की बातों का जवाब देने के बजाय वंदे मातरम् की ही जांच-पड़ताल शुरू कर दी।”

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